धर्म-अध्यात्म

15 July से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानिए पूजा और घटस्थापना का खास मुहूर्त

Ratna Netam
13 July 2026 8:46 PM IST
15 July से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानिए पूजा और घटस्थापना का खास मुहूर्त
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New Delhi नई दिल्ली : सनातन धर्म में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह समय मां दुर्गा की गुप्त साधनाओं और विशेष अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को लेकर ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे बेहद खास बताया जा रहा है। मान्यता है कि इस बार करीब 230 साल बाद दुर्लभ ‘शश-महालक्ष्मी योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे धन, समृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए शुभ संयोग माना जा रहा है।

15 जुलाई से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि

इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई 2026, बुधवार से होगी और इसका समापन 22 जुलाई 2026, बुधवार को होगा। सामान्य नवरात्रि की तुलना में गुप्त नवरात्रि में साधना और पूजा-अनुष्ठान अधिक गोपनीय तरीके से किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मां दुर्गा के विशेष स्वरूपों की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गृहस्थ लोगों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से परेशानियों से राहत मिल सकती है और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 15 जुलाई को सुबह 8 बजकर 2 मिनट का समय घटस्थापना के लिए शुभ माना जा रहा है। इस दौरान पुष्य नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग बन रहा है। इसके बाद वज्र योग का प्रभाव रहेगा।

धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने और विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से साधना का फल अधिक प्राप्त होता है।

शश-महालक्ष्मी योग का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शश योग पंचमहापुरुष योगों में से एक माना जाता है। वहीं महालक्ष्मी योग को धन और ऐश्वर्य से जुड़ा शुभ योग माना जाता है। दोनों योगों के संयोग को स्थिरता, सफलता और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि इस दुर्लभ योग में मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की आराधना करने से आर्थिक परेशानियों से मुक्ति और जीवन में समृद्धि के मार्ग खुल सकते हैं।

दस महाविद्याओं की होती है साधना

गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शक्तियों की आराधना करने से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, आत्मविश्वास और जीवन में सकारात्मक बदलाव प्राप्त होते हैं।

गृहस्थों के लिए आसान उपाय

गुप्त नवरात्रि में गृहस्थ लोग भी सरल उपाय कर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा के दौरान लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। मां को गुड़हल का फूल, साबुत लौंग और अनार का भोग अर्पित किया जा सकता है।

इस दौरान ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै स्वाहा’ और ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ जैसे मंत्रों का जाप करने की भी मान्यता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का यह विशेष काल श्रद्धा, साधना और सकारात्मक संकल्पों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि, पूजा और अनुष्ठान हमेशा अपनी श्रद्धा और परंपराओं के अनुसार ही करने चाहिए।

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