धर्म-अध्यात्म

पितरों की विदाई के बाद मां दुर्गा का आगमन, जानें इस परंपरा का महत्व

nidhi
8 Oct 2026 1:11 PM IST
पितरों की विदाई के बाद मां दुर्गा का आगमन, जानें इस परंपरा का महत्व
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पितृ पक्ष और नवरात्रि का क्या है खास संबंध?
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद कर उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जबकि शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। दोनों पर्वों का धार्मिक महत्व अलग-अलग है, लेकिन इनका एक के बाद एक आना हिंदू पंचांग की विशेष व्यवस्था को दर्शाता है।
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है। इसके बाद सामान्यतः आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि शुरू होती है। इस क्रम को पूर्वजों के स्मरण से देवी शक्ति की आराधना की ओर बढ़ने वाले आध्यात्मिक परिवर्तन के रूप में भी देखा जाता है।
पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक परंपराओं में इस अवधि को स्मरण, कृतज्ञता और आत्मचिंतन से जोड़कर देखा जाता है। वहीं नवरात्रि को शक्ति, भक्ति, नई ऊर्जा और सकारात्मकता का पर्व माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है, जबकि नवरात्रि में देवी दुर्गा की उपासना से जीवन में साहस, शक्ति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
शारदीय नवरात्रि का संबंध ऋतु परिवर्तन से भी जोड़ा जाता है। यह पर्व वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु के आगमन के समय मनाया जाता है। इस दौरान उपवास, सात्विक भोजन, पूजा-पाठ और संयम का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि व्रत और खानपान की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इन नौ स्वरूपों को शक्ति और भक्ति के विभिन्न प्रतीकों के रूप में देखा जाता है।
पितृ पक्ष और नवरात्रि का यह क्रम जीवन में कृतज्ञता और नई शुरुआत, दोनों के महत्व को समझाता है। पहले पूर्वजों का सम्मान और फिर देवी शक्ति की उपासना भारतीय धार्मिक परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है।
शारदीय नवरात्रि 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी और शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026, रविवार से प्रारंभ होगी। विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
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