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धर्म-अध्यात्म
सूर्य ग्रहण के दौरान कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क, जानें क्या करें और क्या नहीं
Ratna Netam
4 Aug 2026 8:40 PM IST

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नई दिल्ली : साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात लगने जा रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और भारतीय समय के अनुसार 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। फिर भी ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण की घटना का विभिन्न राशियों पर प्रभाव बताया गया है। विशेष रूप से कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्तमान समय में कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है। ऐसे में सूर्य ग्रहण का प्रभाव इस राशि के लोगों के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ग्रहण के दौरान मानसिक तनाव, छोटी-छोटी बातों पर विवाद या भावनात्मक असंतुलन जैसी स्थितियां बन सकती हैं। इसलिए इस अवधि में धैर्य और संयम बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य ग्रहण के समय कुंभ राशि के लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। यदि पहले से किसी बीमारी का इलाज चल रहा है तो समय पर दवा लेना जरूरी है। शरीर को पर्याप्त पानी मिलता रहे, इसका भी ध्यान रखना चाहिए ताकि डिहाइड्रेशन जैसी समस्या न हो। यदि कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहेगा।
दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों के लिहाज से भी यह समय थोड़ा संवेदनशील माना जा रहा है। ग्रहण के दौरान जीवनसाथी या पार्टनर के साथ अनावश्यक बहस या विवाद से बचने की सलाह दी गई है। छोटी-छोटी बातों को बढ़ाने के बजाय शांत रहकर परिस्थितियों को संभालना अधिक उचित होगा। रिश्तों में संवाद बनाए रखना और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना इस समय लाभकारी माना गया है। यदि संभव हो तो ग्रहण के दौरान डेटिंग या नए संबंधों की शुरुआत जैसे निर्णय कुछ समय के लिए टाल देना बेहतर रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में कुछ विशेष सावधानियां बरतने की भी सलाह दी जाती है। इस दौरान जंक फूड या बाहर का भोजन खाने से बचना चाहिए। साफ-सुथरा और हल्का भोजन करना अधिक उचित माना जाता है। साथ ही नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करने और अनावश्यक जोखिम वाले कार्यों से दूरी बनाए रखने की भी परंपरा रही है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और ज्योतिषीय विश्वास हैं।
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र और उत्तरी स्पेन सहित कुछ अन्य देशों में देखा जा सकेगा। यूरोप के कई हिस्सों में इसका आंशिक दृश्य भी दिखाई देगा। भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण धार्मिक दृष्टि से सूतक काल लागू नहीं होगा, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राशियों पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर लोग सतर्कता बरतते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रहण के समय घबराने की आवश्यकता नहीं है। संयम, सकारात्मक सोच और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर किसी भी संभावित परेशानी से बचा जा सकता है। ज्योतिषीय उपायों को व्यक्तिगत आस्था का विषय माना जाता है और इन्हें अपनाना पूरी तरह व्यक्ति की श्रद्धा पर निर्भर करता है।
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