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धर्म-अध्यात्म
Annapurna Jayanti 4-5 दिसंबर को: तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
Harrison
29 Nov 2025 7:29 PM IST

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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : अन्नपूर्णा जयंती, हिंदू धर्म में मां अन्नपूर्णा को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व, इस वर्ष 4 और 5 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जहां लोग अन्न और भोजन की देवी अन्नपूर्णा का पूजन करते हैं। अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है, जो घर में समृद्धि और जीवन में भोजन की प्रचुरता सुनिश्चित करती हैं।
अन्नपूर्णा जयंती का पर्व विशेष रूप से उन परिवारों के लिए अत्यंत महत्व रखता है जो भोजन और अन्न की पूजा में विश्वास रखते हैं। इस दिन भक्त देवी अन्नपूर्णा की प्रतिमा के सामने विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, जिसमें देवी को मीठा भोग, फल और अनाज अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है और अन्नपूर्णा का स्तोत्र पढ़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि और भोजन की कभी कमी नहीं होती।
इस वर्ष, अन्नपूर्णा जयंती 4 दिसंबर को प्रारंभ होकर 5 दिसंबर तक मनाई जाएगी। धार्मिक कैलेंडर के अनुसार, इस दिन के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। पूजा की शुरुआत सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक सबसे शुभ मानी जाती है। इस समय में देवी की आराधना और मंत्रोच्चारण करने से विशेष लाभ होता है। साथ ही, दिनभर अन्नदान और गरीबों को भोजन कराने को भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
अन्नपूर्णा जयंती का पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है। इस दिन कई मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में बड़ी संख्या में भक्त इकट्ठा होते हैं। मंदिरों में विशेष हवन, भजन, कीर्तन और धार्मिक प्रवचन का आयोजन किया जाता है। कई स्थानों पर अन्नपूर्णा महायज्ञ का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें हजारों लोगों को निःशुल्क भोजन कराया जाता है। यह परंपरा समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देती है।
मान्यता है कि अन्नपूर्णा देवी का निवास घर में होता है जहाँ अन्न और भोजन का नियमित आयोजन होता है। इस दिन भक्त अपने घरों में भी देवी की प्रतिमा के सामने अन्न का भोग अर्पित करते हैं। कई लोग इस अवसर पर अपने घर के रसोईघर और भोजनालय को विशेष रूप से साफ-सुथरा और सजाते हैं, ताकि देवी को प्रसन्न किया जा सके। अन्नपूर्णा जयंती के अवसर पर अन्नदान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। गरीबों, भूखे बच्चों और जरूरतमंदों को भोजन देने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अन्नपूर्णा देवी केवल भोजन का दान ही नहीं देतीं, बल्कि जीवन में ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि भी प्रदान करती हैं। इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति के घर में सौभाग्य, शांति और खुशहाली आती है। इसलिए, भक्त इस अवसर पर पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
विशेष रूप से, इस वर्ष अन्नपूर्णा जयंती का पर्व 4 दिसंबर की शाम से 5 दिसंबर की सुबह तक धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान अन्न और भोजन से संबंधित गतिविधियों में भाग लेना और समाज में भोजन का वितरण करना शुभ फलदायी होगा।
अन्नपूर्णा जयंती केवल धार्मिक पर्व ही नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व लोगों को समाज सेवा, दान और सहयोग की भावना सिखाता है। इस अवसर पर लोग अपने आस-पास के जरूरतमंदों की मदद करते हैं और समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत बनाते हैं।
इस प्रकार, 4 और 5 दिसंबर को आने वाली अन्नपूर्णा जयंती न केवल धार्मिक श्रद्धा का अवसर है, बल्कि समाज में मानवता, सहयोग और करुणा की भावना को बढ़ावा देने का भी महत्व रखती है। भक्त इस दिन माँ अन्नपूर्णा की पूजा करके अपने घर और जीवन में समृद्धि, सुख और शांति की कामना करते हैं।
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