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धर्म-अध्यात्म
Annapurna Jayanti 2025: जानें क्यों पार्वती जी ने धारण किया देवी अन्नपूर्णा का रूप
Harrison
3 Dec 2025 8:16 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू धर्म में अन्न का विशेष महत्व माना जाता है और इस महत्व को समर्पित देवी हैं अन्नपूर्णा। हर साल पौष मास की कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाई जाने वाली अन्नपूर्णा जयंती इस साल 2025 में विशेष भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। अन्नपूर्णा माता को अन्न और भोजन की देवी माना जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से भूख और कुपोषण दूर करती हैं। इस अवसर पर भक्तजन मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और विशेष प्रसाद का वितरण करते हैं।
अन्नपूर्णा जयंती की कथा अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, एक समय पार्वती जी और भगवान शिव के बीच भोजन को लेकर एक विशेष घटना हुई थी। देवों और मानवों की भूख और उनके जीवन में अन्न की अहमियत को देखकर पार्वती जी ने स्वयं अन्न का रूप धारण करने का निर्णय लिया।
कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ध्यानमग्न थे और इस दौरान पूरे ब्रह्मांड में अन्न का संकट उत्पन्न हो गया। भूख और कुपोषण की समस्या से देवता और साधु परेशान थे। लोगों के जीवन में भोजन की कमी ने चिंता का माहौल बना दिया। तब पार्वती जी ने देखा कि केवल शिव का तप और ध्यान पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन की मूल आवश्यकता अन्न की पूर्ति भी अत्यंत आवश्यक है। इस विचार से प्रेरित होकर उन्होंने अन्नपूर्णा का रूप धारण किया।
अन्नपूर्णा रूप में पार्वती जी ने सभी जीवों को अन्न का महत्व समझाया और उनकी भूख दूर की। देवी ने अपने हाथ में शंख और अन्न का पात्र लेकर प्रत्येक जीव को भोजन प्रदान किया। उनके अन्नपूर्णा रूप का उद्देश्य केवल भोजन देना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना कितना महत्वपूर्ण है।
पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि अन्नपूर्णा देवी का यह रूप दर्शाता है कि अन्न और भोजन केवल भौतिक आवश्यकता नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अन्न की दानशीलता और अन्न वितरण की प्रक्रिया समाज में सहयोग और भाईचारे की भावना को भी बढ़ाती है। अन्नपूर्णा माता के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि भूख मिटाना और जरूरतमंदों की सहायता करना धर्म का महत्वपूर्ण अंग है।
भक्तों का मानना है कि अन्नपूर्णा जयंती पर जो कोई भी श्रद्धा और भक्ति के साथ अन्न दान करता है, उसे अन्न से संबंधित समस्त कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। अन्नपूर्णा माता का यह रूप यह भी सिखाता है कि सभी जीवों के जीवन में संतुलित आहार और पोषण की व्यवस्था करना आवश्यक है। इस दिन विशेष रूप से मंदिरों में अन्नदान और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है।
अन्नपूर्णा जयंती का उत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी प्रेरणादायक है। यह हमें यह याद दिलाता है कि भोजन और अन्न का महत्व केवल पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सहयोग, करुणा और मानवता की भावना को भी विकसित करता है।
इस वर्ष 2025 में अन्नपूर्णा जयंती पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा, कथा वाचन और प्रसाद वितरण का आयोजन होगा। भक्तजन इस अवसर पर अन्नदान और विशेष भोग अर्पित कर देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए उमड़ेंगे। अन्नपूर्णा माता की भक्ति से न केवल जीवन में भौतिक समृद्धि आती है, बल्कि आध्यात्मिक संतोष और मानसिक शांति भी मिलती है।
संक्षेप में, अन्नपूर्णा जयंती की कथा यह सिखाती है कि पार्वती जी ने देवी अन्नपूर्णा का रूप धारण करके जीवन में अन्न और भोजन की महत्ता को उजागर किया। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि समाज में सहयोग, करुणा और जरूरतमंदों की मदद करने की भावना हमेशा बनी रहनी चाहिए। अन्नपूर्णा माता के आशीर्वाद से प्रत्येक व्यक्ति का जीवन संतुलित और समृद्ध बनता है।
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