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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : अन्नपूर्णा जयंती, जिसे देवी अन्नपूर्णा की पूजा के लिए मनाया जाता है, हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। देवी अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है, और यह माना जाता है कि उनकी पूजा करने से घर में समृद्धि, सुख-शांति और भरपूर अन्न की प्राप्ति होती है। इस वर्ष अन्नपूर्णा जयंती 2025 में विशेष रूप से ध्यान देने योग्य शुभ मुहूर्त और योग के साथ मनाई जाएगी।
अन्नपूर्णा जयंती कब है:
अन्नपूर्णा जयंती हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में अन्नपूर्णा जयंती 28 नवंबर को है। इस दिन पूरे देश में मंदिरों और घरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भक्तजन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके, शुद्ध वस्त्र धारण करके देवी अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं।
शुभ मुहूर्त और समय:
अन्नपूर्णा जयंती के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है।
पूजा का शुभ समय: सुबह 7:30 बजे से 10:15 बजे तक
अन्नपूर्णा जयंती का विशेष योग: इस दिन शुभ योग और साधारण योग दोनों बनाए गए हैं। यह समय विशेष रूप से देवी की आराधना और दान करने के लिए अनुकूल माना जाता है।
स्नान और व्रत का समय: दिन के प्रारंभिक समय में स्नान करना और व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना गया है।
पूजा विधि और महत्व:
अन्नपूर्णा जयंती के दिन देवी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर, अक्षत (चावल), फूल, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। भक्तजन देवी को गेंहू, चावल, और अन्य अन्न का भोग अर्पित कर अपने घर और परिवार में समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही, इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न और भोजन देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि अन्नपूर्णा देवी की कृपा से किसी भी घर में अन्न की कमी नहीं होती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। यह पर्व विशेष रूप से गृहिणियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देवी अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना गया है।
अन्नपूर्णा जयंती के दौरान विशेष उपाय:
इस दिन चावल और अन्य अन्न को साफ़ करके, घर के मंदिर में देवी अन्नपूर्णा को अर्पित करना चाहिए।
इस दिन व्रत करने वाले पूरे दिन फलाहार और अन्न से परहेज करते हैं।
दान-पुण्य करने से देवी अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त होती है।
समाज और संस्कृति में महत्व:
अन्नपूर्णा जयंती केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज और संस्कृति का भी प्रतीक है। इस दिन मंदिरों में बड़े पैमाने पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोगों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सहयोग और दानशीलता की भावना बढ़ती है।
इस वर्ष 2025 में अन्नपूर्णा जयंती का पर्व विशेष रूप से कार्तिक मास की पावन तिथि पर पड़ रहा है, जो इसे और भी अधिक शुभ बनाता है। इस दिन का उद्देश्य न केवल देवी की पूजा करना है, बल्कि जीवन में अन्न और संसाधनों के महत्व को समझना और दूसरों के साथ साझा करना भी है।
अंततः अन्नपूर्णा जयंती हमें यह सिखाती है कि अन्न और भोजन का महत्व केवल भौतिक स्तर पर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर भी है। इस दिन की पूजा और दान करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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