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धर्म-अध्यात्म
अजा एकादशी का पावन व्रत आज जानें सही तिथि शुभ मुहूर्त और महत्व
nidhi
25 Aug 2026 11:49 AM IST

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एकादशी पर बन रहे शुभ योग
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित अजा एकादशी को बेहद पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आने के साथ मानसिक परेशानियां दूर होती हैं।
अजा एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों से उबरने की शक्ति मिलती है।
कब है अजा एकादशी 2026?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अजा एकादशी 7 सितंबर 2026, सोमवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत रखा जाएगा।
एकादशी व्रत में तिथि और पारण का विशेष ध्यान रखा जाता है। श्रद्धालु सूर्योदय के बाद व्रत का संकल्प लेते हैं और अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि अनुसार पारण करते हैं।
अजा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत करने से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। कहा जाता है कि भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति को मानसिक शांति, धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, फल, फूल और तुलसी दल अर्पित करने का विशेष महत्व माना गया है। भक्त पूरे दिन भगवान का स्मरण करते हैं और विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं।
पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
भगवान को पीले फूल, फल और तुलसी अर्पित करें।
विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्रों का पाठ करें।
जरूरतमंद लोगों को दान करें।
शुभ मुहूर्त का रखें ध्यान
एकादशी व्रत में पूजा और पारण का समय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने स्थान के अनुसार स्थानीय पंचांग से सही समय जरूर देखना चाहिए।
दुख-दर्द दूर करने वाली मानी जाती है अजा एकादशी
धार्मिक मान्यताओं में अजा एकादशी को जीवन के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ यह व्रत करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
हालांकि, व्रत और धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं। इनके पालन का उद्देश्य आत्मिक शांति, अनुशासन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है।
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