धर्म-अध्यात्म

अजा एकादशी की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और व्रत विधि

Tara Tandi
5 Sept 2026 2:30 PM IST
अजा एकादशी की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और व्रत विधि
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Aja Ekadashi ज्योतिष न्यूज़: हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति हो सकती है। इस साल एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण असमंसज की स्थिति बनी हुई है कि 6 या फिर 7 अगस्त को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार अजा एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण का समय,
पूजा विधि और आरती
अजा एकादशी 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर, रविवार को शाम को 7 बजकर 30 मिनट पर आरंभ हो रहा है, जो अगले दिन यानी 7 सितंबर को शाम के 5 बजकर 5 मिनट तक समाप्त हो रही है। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से 7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
भाद्रपद कृष्ण एकादशी तिथि आरंभ- 6 सितंबर को शाम में 7 बजकर 30 मिनट पर
भाद्रपद कृष्ण एकादशी तिथि समाप्त- 7 सितंबर को शाम में 5 बजकर 5 मिनट पर
अजा एकादशी व्रत- 7 सितंबर, सोमवार
अजा एकादशी 2026 पारण का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर को 06:02 ए एम से 08:33 ए एम के बीच किया जा सकता है।
अजा एकादशी 2026 पर बन रहा शुभ योग
अजा एकादशी के दिन सुबह पुनर्वसु नक्षत्र के साथ पुष्य नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही वरीयान योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा ग्रहों की स्थिति के हिसाब से गुरु हंस राजयोग, शुक्र मालव्य राजयोग, बुध भद्र राजयोग और कर्क राशि में चंद्रमा-गुरु गजकेसरी राजयोग का निर्माण कर रहे हैं।
अजा एकादशी 2026 पूजा विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त या फिर सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें। अब सूर्यदेव को अर्घ्य दें और फिर पूजा आरंभ करें। सबसे पहले विष्णु जी का जल से आचमन करने के बाद पीला चंदन, अक्षत, फूल, माला, वस्त्र, आभूषण आदि अर्पित करने के साथ तुलसी दल के साथ खीर, मिठाई और फल को भोग लगाएं। इसके बाद जल अर्पित करने के साथ घी का दीपक और धूप जलाकर विष्णु मंत्र. विष्णु चालीसा के साथ अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ कर लें। अंत में विष्णु जी के साथ एकादशी माता की आरती कर लें। दिनभर व्रत रखने के बाद द्वादशी तिथि को विधिवत पूजा करने के साथ अपने व्रत का पारण करें।
विष्णु जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
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