धर्म-अध्यात्म

Ahoi Ashtami Vrat: यह कथा है संतान पर देवी का आशीर्वाद पाने का उपाय

Tara Tandi
13 Oct 2025 1:48 PM IST
Ahoi Ashtami Vrat: यह कथा है संतान पर देवी का आशीर्वाद पाने का उपाय
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Ahoi Ashtami Vrat ज्योतिष न्यूज़: अहोई अष्टमी का व्रत मुख्य रूप से महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं अहोई माता की पूजा करती हैं। अहोई अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। तो आइए पढ़ते हैं अहोई अष्टमी की कथा।
अहोई अष्टमी व्रत कथा
अहोई अष्टमी की कथा के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहता था जिसके सात बेटे और सात बहुएँ थीं। दिवाली से एक दिन पहले, सातों बहुएँ और एक ननद उनके साथ घर की लीपापोती के लिए मिट्टी लेने खेतों में गईं। साहूकार की बेटी की कुदाल गलती से एक "सेही" (झानुमुसा) के सात बच्चों पर लग गई और वे मर गए। क्रोधित होकर स्याहु ने उसे श्राप दिया, "मैं तुम्हारी कोख बाँध दूँगी।" तब साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा कि वे उसकी जगह अपनी कोख बाँध लें। सभी ने मना कर दिया, लेकिन सबसे छोटी बहू मान गई।
पंडित ने यह सलाह दी:
जब भी साहूकार की सबसे छोटी बहू किसी बच्चे को जन्म देती, तो सातवें दिन उसकी मृत्यु हो जाती। सातों बेटों की इसी तरह मृत्यु हो गई। साहूकार ने तब एक पंडित को यह घटना बताई। पंडित ने छोटी बहू को सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी। सुरही गाय उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे स्याहु के पास ले गई। रास्ते में थककर वे दोनों आराम करने लगीं। तभी साहूकार की बहू ने एक साँप को एक बाज के बच्चे को डसते देखा। यह देखकर छोटी बहू ने साँप को मार डाला।
स्याहु ने यह आशीर्वाद दिया:
तभी गरुड़ वहाँ पहुँचे और खून देखकर यह मान लिया कि छोटी बहू ने उनके बच्चे को मार डाला है। इस कारण वे छोटी बहू को चोंच मारने लगे। तब छोटी बहू ने उन्हें बताया कि उसने गरुड़ के बच्चे को बचा लिया। यह सुनकर गरुड़ प्रसन्न होते हैं और सुरही गाय सहित उन्हें स्याहु के पास ले जाते हैं। छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर स्याहु उसे सात पुत्रों और सात बहुओं का आशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्रों और बहुओं से भर जाता है।
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