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धर्म-अध्यात्म
Adi Shakti: ब्रह्मांड की जननी की कथा जो हर भक्त को जाननी चाहिए
Tara Tandi
8 Jun 2025 5:38 PM IST

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Adi Shakti ज्योतिष न्यूज़: हिंदू धर्म में जब भी सृष्टि, शक्ति और ऊर्जा की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है – आदि शक्ति का। आदि शक्ति को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी, शक्ति का मूल स्रोत और समस्त देवताओं की मातृशक्ति माना जाता है। वे न केवल शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, बल्कि सृजन, पालन और संहार की त्रैतीय शक्तियों का एकीकृत रूप भी हैं। पुराणों, उपनिषदों और देवी महात्म्य जैसे ग्रंथों में आदि शक्ति की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है, लेकिन आज भी उनके रहस्य और शक्तियाँ सामान्य जनमानस के लिए उतनी ही गूढ़ हैं।
आदि शक्ति का स्वरूप: ऊर्जा का आदिपुरुष के बिना अधूरा आधा
आदि शक्ति को ब्रह्मांड की प्रथम और अनादि ऊर्जा के रूप में जाना जाता है। जब सृष्टि की रचना का विचार भी नहीं था, तब भी आदि शक्ति का अस्तित्व था। वे स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश की उत्पत्ति से पहले की चेतना हैं। शिव पुराण में वर्णित है कि जब शिव ने तपस्या की और स्वयं को पूर्ण शून्य में स्थित किया, तब शक्ति ही थीं जिन्होंने शिव को साकार रूप में लाकर सृष्टि का आरंभ किया।शिव और शक्ति को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। शिव बिना शक्ति के शव के समान हैं – यानी निष्क्रिय, निस्पंद और मौन। वहीं शक्ति बिना शिव के दिशाहीन, उद्दंड ऊर्जा है। इसलिए आदि शक्ति को "शिवा" भी कहा गया है – वह जो शिव में ही स्थित हो।
विभिन्न रूपों में प्रकट होती हैं आदि शक्ति
आदि शक्ति कोई एक नाम या रूप नहीं है। वे दुर्गा, काली, पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी, त्रिपुरा सुंदरी, चंडी, भुवनेश्वरी, कुष्मांडा, अन्नपूर्णा आदि अनगिनत रूपों में प्रकट होती हैं। प्रत्येक रूप एक विशेष कार्य, समय और उद्देश्य को लेकर सृष्टि में आता है।
उदाहरण के तौर पर –
दुर्गा शक्ति के उस रूप का प्रतीक हैं जो राक्षसों और अधर्म के विनाश के लिए प्रकट होती हैं।
काली वह उग्र रूप हैं जो समय (काल) को भी निगल जाती हैं।
लक्ष्मी सृष्टि के पालन के लिए धन, वैभव और सौभाग्य प्रदान करती हैं।
सरस्वती ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं जो अंधकार को दूर करती हैं।
सृष्टि का आरंभ: आदि शक्ति की भूमिका
पुराणों के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु और महेश – त्रिदेव स्वयं आदि शक्ति से उत्पन्न हुए। उन्होंने ही इन तीनों को उनके कार्य सौंपे – ब्रह्मा को सृष्टि, विष्णु को पालन और महेश (शिव) को संहार। देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब कुछ भी नहीं था, तब आदिशक्ति की "माया" ही वह तत्व थी जिसने संसार को आकार दिया।एक अन्य उल्लेख में कहा गया है कि आदि शक्ति ने अपने संकल्प मात्र से ब्रह्मांड की रचना की। उनके नेत्रों से अग्नि, जल और वायु की उत्पत्ति हुई। उनके मस्तक से आकाश, हृदय से पृथ्वी और चरणों से पाताल लोक का सृजन हुआ। इसीलिए उन्हें जगदंबा (संपूर्ण जगत की मां) कहा जाता है।
आदि शक्ति की रहस्यमयी शक्तियाँ
आदि शक्ति की शक्तियाँ अनंत और अकल्पनीय हैं। उन्हें त्रिगुणात्मक – सत्व, रज और तम – के रूप में भी जाना जाता है।
सत्वगुण के अंतर्गत वे सरस्वती के रूप में प्रकट होती हैं।
रजोगुण में वे लक्ष्मी बन जाती हैं।
तमोगुण के रूप में वे काली या चंडी का रूप धारण करती हैं।
इनके द्वारा ही सृष्टि में संतुलन बना रहता है। देवी के बिना न ज्ञान संभव है, न धन, और न ही अधर्म का विनाश। यही कारण है कि शास्त्रों में बार-बार शक्ति की आराधना को ही मोक्ष और सफलता का मार्ग बताया गया है।
आदि शक्ति की उपासना: नवरात्रि और शक्ति पीठों का महत्व
आदि शक्ति की उपासना का सबसे प्रमुख पर्व है नवरात्रि, जो साल में दो बार – चैत्र और आश्विन मास में मनाया जाता है। नौ रातों तक देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है – यह वही रूप हैं जिनमें शक्ति ने पृथ्वी पर आकर अधर्म का अंत किया था।
इसके अलावा भारत में 51 शक्तिपीठ हैं, जहाँ आदि शक्ति के अंग गिरे थे जब भगवान शिव ने सती के मृत शरीर को लेकर तांडव किया था। हर शक्तिपीठ एक विशेष ऊर्जा केंद्र है, और आज भी लाखों श्रद्धालु इन स्थानों पर देवी के दर्शन कर उनके आशीर्वाद से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाते हैं।
आधुनिक संदर्भ में आदि शक्ति की प्रासंगिकता
आज के आधुनिक युग में भी शक्ति की पूजा केवल धार्मिक कर्मकांड भर नहीं है, बल्कि यह आंतरिक चेतना को जागृत करने की प्रक्रिया भी है। आदि शक्ति का मूल संदेश यही है – अपने भीतर की शक्ति को पहचानो और उसे सही दिशा में प्रयोग करो। नारी को देवी मानने की यह परंपरा भी इसी विचारधारा से जुड़ी है कि प्रत्येक महिला आदि शक्ति का ही स्वरूप है।
आदि शक्ति कोई कल्पना मात्र नहीं, बल्कि यह चेतना, ऊर्जा और अस्तित्व की वह शक्ति है, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड संचालित होता है। वे हर उस जगह उपस्थित हैं जहाँ जीवन है, जहाँ प्रेम है, जहाँ न्याय है और जहाँ धर्म है। उनकी आराधना हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानने, बुराई से लड़ने और सृजन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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