धर्म-अध्यात्म

Chanakya के अनुसार किनके साथ रहना मृत्यु के समान

Harrison
9 Dec 2025 6:49 PM IST
Chanakya  के अनुसार किनके साथ रहना मृत्यु के समान
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : प्राचीन भारत के महान दार्शनिक, राजनयिक और अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य के विचार आज भी समाज, राजनीति और व्यक्तिगत जीवन में उतने ही प्रासंगिक माने जाते हैं, जितने उनके समय में थे। उनकी रचना ‘चाणक्य नीति’ में जीवन प्रबंधन, संबंधों, व्यवहार, नेतृत्व और नैतिकता से जुड़े अनमोल सिद्धांत शामिल हैं। इसी नीति में चाणक्य ने कुछ प्रकार के लोगों के साथ रहने को “साक्षात मृत्यु” के समान बताया है। यह कथन आज के समय में भी इंसान के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को दिशा देने वाला माना जाता है।
चाणक्य का मानना था कि मनुष्य का स्वभाव उसके वातावरण और संगति से प्रभावित होता है। इसलिए यदि संगति गलत हो तो व्यक्ति का जीवन, करियर, मानसिक शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा तक प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि कुछ लोगों के साथ रहना ऐसा है मानो व्यक्ति स्वयं अपने विनाश को बुला रहा हो।
चाणक्य के अनुसार इन लोगों की संगति मृत्यु के तुल्य मानी जाती है:
1. कपटी और विश्वासघाती लोग
चाणक्य कहते हैं कि कपटी व्यक्ति दिखावे में चाहे कितना भी विनम्र और दयालु क्यों न लगे, उसका असली स्वभाव अवसर मिलते ही सामने आता है। ऐसा व्यक्ति मित्र बनकर भी पीठ में छुरा घोंपने से नहीं चूकता। चाणक्य का मानना था कि विश्वासघाती लोगों के साथ रहना व्यक्ति की मानसिक शांति छीन सकता है और जीवन में अनावश्यक संकट खड़ा कर सकता है। इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही बुद्धिमानी है।
2. आलसी और गैर-जिम्मेदार लोग
चाणक्य नीति में आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे लोगों की संगति में रहने लगता है तो धीरे-धीरे उसके अंदर भी वही नकारात्मक गुण विकसित होने लगते हैं। आलसी व्यक्ति न अपना भला कर सकता है न दूसरों का। उनके साथ रहने से जीवन में प्रगति रुक जाती है और समय नष्ट होता है, जिसका परिणाम अंततः विनाशकारी हो सकता है।
3. अधर्मी और भ्रष्ट प्रवृत्ति वाले लोग
चाणक्य धर्म और नीति को जीवन के संतुलन के लिए आवश्यक मानते थे। अधर्मी, अत्याचारी या गलत कार्यों में संलग्न लोगों का साथ इंसान को भी गलत राह पर ले जा सकता है। वे कहते हैं कि इन लोगों का परिणाम निश्चित रूप से विनाश होता है और जो उनके करीब रहते हैं, वे भी उसी दिशा में बढ़ते हैं। इसलिए ऐसे लोगों के साथ रहना साक्षात मृत्यु के बराबर है।
4. नशे के आदी और दुर्व्यसनों में फंसे लोग
चाणक्य ने उन लोगों से दूरी बनाने की सलाह दी है जो नशे के आदी हों या दुर्व्यसनों में डूबे हों, क्योंकि ऐसे लोग स्वयं अपना नुकसान करते हैं और साथ रहने वालों को भी खतरे में डाल देते हैं। उनके साथ लगातार रहना व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
5. झूठ बोलने वाले और दोमुंहे लोग
ऐसे लोग सिर्फ अपनी सुविधा के अनुसार सत्य और असत्य का खेल खेलते रहते हैं। चाणक्य के अनुसार, झूठे लोगों पर भरोसा करना पतन का कारण बनता है। उनकी संगति मन में भ्रम, तनाव और असुरक्षा पैदा करती है, जो व्यक्ति के व्यक्तिगत व पेशेवर जीवन दोनों को प्रभावित कर सकती है।
चाणक्य की सोच आज भी क्यों प्रासंगिक है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि चाणक्य के ये विचार आधुनिक जीवन पर भी समान रूप से लागू होते हैं। आज के दौर में संबंध, करियर, सोशल मीडिया और कार्यस्थल पर संगति का प्रभाव पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। गलत संगति न सिर्फ समय और ऊर्जा को नष्ट करती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, निर्णय क्षमता और भविष्य के अवसरों पर भी असर डालती है।
इसीलिए चाणक्य का यह कथन कि “कुछ लोगों के साथ रहना साक्षात मृत्यु के समान है”, आज भी चेतावनी और मार्गदर्शन दोनों का कार्य करता है। उनका संदेश स्पष्ट है—सही संगति जीवन को बना सकती है और गलत संगति जीवन को बर्बाद कर सकती है।
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