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Religion धर्म : जयपुर की पुरानी बस्ती की तंग गलियों में स्थित Gopinath Ji Temple, Jaipur श्रद्धा और आस्था का एक अनोखा केंद्र है। यह मंदिर लगभग 150 साल पुराना माना जाता है और अपनी विशिष्ट परंपरा के कारण पूरे देश में अलग पहचान रखता है। यहां भगवान कृष्ण गोपीनाथ रूप में विराजमान हैं और उनकी कलाई पर घड़ी बंधी रहती है, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, ब्रिटिश काल में एक अंग्रेज अधिकारी ने यह सुना कि इस मंदिर की मूर्ति में दिव्य शक्ति है। जांच के लिए उसने अपनी नब्ज से चलने वाली घड़ी भगवान की कलाई पर बांध दी। कहा जाता है कि वह घड़ी बंद होने के बजाय चलने लगी, जिसके बाद से यह परंपरा शुरू हो गई। तभी से भगवान गोपीनाथ की कलाई पर घड़ी बंधी रहती है।स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर शेखावत राजपूत समाज का कुल देवता स्थल माना जाता है। इस समाज के साथ-साथ देश-विदेश से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि वे अपनी मनोकामना पूरी होने पर भगवान को घड़ियां अर्पित करते हैं। समय-समय पर इन घड़ियों को बदला भी जाता है, लेकिन परंपरा आज भी जारी है।
मंदिर में पूजा की परंपरा भी बेहद खास है। बताया जाता है कि सदियों से बंगाल के एक ही ब्राह्मण परिवार के पुजारी यहां सेवा करते आ रहे हैं और आज भी उनकी पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। भक्त यहां केवल पारंपरिक शृंगार ही नहीं बल्कि आधुनिक और डिजिटल घड़ियां भी भेंट करते हैं।देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु जैसे ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से लोग विशेष रूप से इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही हर भक्त की नजर सबसे पहले भगवान की कलाई पर बंधी घड़ी पर पड़ती है, जो इसे और भी रहस्यमयी और आकर्षक बनाती है।यह मंदिर आस्था और लोककथाओं का ऐसा संगम है, जहां श्रद्धा के साथ-साथ एक अनोखी परंपरा आज भी जीवित है और हर आने वाले भक्त को आश्चर्यचकित कर देती है।





