धर्म-अध्यात्म

Rajasthan का अनोखा मंदिर जहां रहते है 25 हजार से भी ज्यादा चूहे

Tara Tandi
19 April 2025 5:56 PM IST
Rajasthan का अनोखा मंदिर जहां रहते है 25 हजार से भी ज्यादा चूहे
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Karni Mata Temple राजस्थान न्यूज़: करणी माता को मां दुर्गा का ही रूप माना जाता है, जिन्होंने लोगों के कल्याण के लिए अवतार लिया था। करणी माता चारण जाति की योद्धा ऋषि थीं, जिन्होंने तपस्वी का जीवन जिया। राजस्थान के बीकानेर के देशनोक शहर में स्थित करणी माता मंदिर लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर की एक खास बात यह है कि इस मंदिर में आपको इंसानों से ज्यादा चूहे नजर आएंगे। इस मंदिर में करीब 25 हजार चूहे मौजूद हैं।
क्यों हैं इतने चूहे
मंदिर में मौजूद इन चूहों को काबा भी कहा जाता है, जो मंदिर परिसर में खुलेआम घूमते रहते हैं। सभी चूहों में से सफेद चूहों को खास महत्व दिया जाता है, क्योंकि इन्हें करणी माता के पुत्रों का अवतार माना जाता है। इसके पीछे एक प्रचलित कहानी है, जिसके अनुसार करणी माता के सौतेले बेटे का नाम लक्ष्मण था। एक दिन झील से पानी पीने की कोशिश करते समय लक्ष्मण उसमें डूब गए, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इससे दुखी होकर करणी माता ने यम देवता से प्रार्थना की और उनसे अपने बेटे को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। तब यमराज उनकी विनती स्वीकार करते हैं और न केवल लक्ष्मण को बल्कि करणी माता के सभी बच्चों को चूहों के रूप में पुनर्जीवित कर देते हैं। इसलिए इन चूहों को करणी माता के बच्चे या वंशज के रूप में देखा जाता है।
ये हैं मान्यताएं
मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि अगर कोई चूहा किसी भक्त के पैरों के ऊपर से गुजर जाए तो इसे उस पर माता की कृपा का संकेत माना जाता है। लेकिन वहीं अगर गलती से कोई चूहा किसी व्यक्ति के पैरों के नीचे आ जाए तो इसे पाप माना जाता है, इसलिए लोग यहां पैर घसीटते हुए चलते हैं। इन चूहों को भोजन कराया जाता है, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना बहुत शुभ माना जाता है।
सुंदरता भी मन को मोह लेती है
मान्यताओं के अनुसार करणी माता मंदिर का निर्माण 20वीं शताब्दी में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। मंदिर पूरी तरह से संगमरमर से बना है और इसके मुख्य द्वार चांदी से बने हैं। करणी माता की मूर्ति में वे एक हाथ में त्रिशूल पकड़े हुए हैं और उन्हें मुकुट और मालाओं से भी सजाया गया है। माता की मूर्ति पर सोने का छत्र भी स्थापित है। देवी की मूर्ति के साथ ही दोनों ओर उनकी बहनों की भी मूर्तियाँ हैं।
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