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धर्म-अध्यात्म
स्वयंभू शिवलिंग के पाताल में समाने की मान्यता से जुड़ी अनोखी कथा
nidhi
28 Aug 2026 9:04 AM IST

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हरिद्वार के शिवलिंग का रहस्य
धर्म : हरिद्वार की पवित्र नगरी में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में से एक है कनखल स्थित दारिद्र भंजन महादेव मंदिर, जहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि यह धीरे-धीरे धरती यानी पाताल की ओर समा रहा है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की अद्भुत लीला मानते हैं।
मान्यता है कि यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था और समय के साथ इसकी ऊंचाई कम होती जा रही है। भक्तों का विश्वास है कि जिस दिन यह पूरी तरह धरती में समा जाएगा, उस दिन कोई बड़ी आध्यात्मिक घटना होगी। हालांकि ऐसी मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं, इनके वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
कनखल से जुड़ी है भगवान शिव की कथा
हरिद्वार का कनखल क्षेत्र पौराणिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था और माता सती ने अपने पिता के अपमान से दुखी होकर यज्ञ अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया था।
इसके बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर वीरभद्र को उत्पन्न किया और दक्ष यज्ञ का विध्वंस हुआ। इसी कारण कनखल को भगवान शिव और माता सती से जुड़ा पवित्र क्षेत्र माना जाता है।
शिवलिंग के धीरे-धीरे नीचे जाने की मान्यता
दारिद्र भंजन महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग को लेकर स्थानीय लोगों में वर्षों से यह विश्वास है कि यह धीरे-धीरे जमीन के अंदर जा रहा है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य शक्ति से जोड़ते हैं।
कई भक्तों का कहना है कि शिवलिंग की स्थिति में समय के साथ बदलाव महसूस किया गया है। इसी वजह से यह स्थान दूर-दूर से आने वाले शिव भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
क्यों खास है यह मंदिर?
दारिद्र भंजन महादेव मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा कर सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
सावन और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में विशेष पूजा, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
आस्था और विज्ञान का अलग-अलग नजरिया
धार्मिक दृष्टि से भक्त इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं, वहीं वैज्ञानिक नजरिए से किसी संरचना के नीचे जाने के पीछे भूगर्भीय कारण हो सकते हैं। जमीन की बनावट, मिट्टी का दबाव या प्राकृतिक बदलाव ऐसी घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
लेकिन आस्था रखने वालों के लिए यह शिव की अद्भुत लीला का प्रतीक है और यही वजह है कि इस शिवलिंग को लेकर लोगों की श्रद्धा लगातार बनी हुई है।
रहस्य के कारण आकर्षण का केंद्र
हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि रहस्य और आस्था से जुड़ा एक अनुभव भी है। शिवलिंग के पाताल में समाने की मान्यता ने इसे और भी खास बना दिया है।
भगवान शिव से जुड़ी ऐसी कथाएं भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही हैं, जहां आस्था, परंपरा और रहस्य एक साथ दिखाई देते हैं।
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