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Raksha Bandhan पर लगेगा चंद्र ग्रहण, इन 4 राशियों के लिए खास रहेगी सावधानी

New Delhi नई दिल्ली : साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण जल्द लगने वाला है। खगोलीय घटनाओं में चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। यह घटना तब होती है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसके कारण कुछ समय के लिए चंद्रमा का प्रकाश कम हो जाता है और ग्रहण की स्थिति बनती है।
इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त की रात को लगने जा रहा है। खास बात यह है कि यह ग्रहण सावन पूर्णिमा के दिन पड़ेगा। सावन पूर्णिमा के दिन ही देशभर में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में इस खगोलीय घटना को लेकर लोगों में खास उत्सुकता बनी हुई है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। मेष से लेकर मीन राशि तक ग्रहण के प्रभाव की चर्चा की जा रही है। कुछ राशियों के लिए इसे शुभ तो कुछ के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जिसका राशियों पर प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
बताया जा रहा है कि इस चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा। इस कारण कुछ समय के लिए चंद्रमा का दृश्य काफी बदल जाएगा। ग्रहण के दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों में ऐसा नजारा देखने को मिल सकता है, जब चंद्रमा की रोशनी काफी कम हो जाएगी।
चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं में भी विशेष नियम बताए गए हैं। हिंदू धर्म में ग्रहण के समय सूतक काल का महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, ग्रहण से कुछ घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर कई परंपराओं का पालन किया जाता है।
रक्षाबंधन के दिन पड़ने वाले इस ग्रहण को लेकर लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या इसका त्योहार पर कोई प्रभाव पड़ेगा और सूतक काल कब से शुरू होगा। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, इसका निर्धारण ग्रहण के समय और उसके भारत में दिखाई देने की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। इसे खुले आसमान में सुरक्षित तरीके से देखा जा सकता है। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण को देखने में आंखों को नुकसान पहुंचने का खतरा नहीं होता।
इस चंद्र ग्रहण को लेकर खगोल विज्ञान में भी रुचि बढ़ गई है। दुनिया के कई हिस्सों में लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रहण के दौरान चंद्रमा के रंग और आकार में होने वाले बदलाव को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उत्साहित रहते हैं।
कुल मिलाकर, 28 अगस्त को लगने वाला साल का आखिरी चंद्र ग्रहण खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बना हुआ है। रक्षाबंधन के दिन पड़ने के कारण इस घटना को लेकर लोगों में विशेष 관심 है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं और इसका सूतक काल किस समय से प्रभावी होगा।





