धर्म-अध्यात्म

हनुमान अंश का भजन हुआ वायरल जानें इसके पीछे छिपी खास कथा

nidhi
12 Sept 2026 10:44 AM IST
हनुमान अंश का भजन हुआ वायरल जानें इसके पीछे छिपी खास कथा
x
जुड़ा पौराणिक प्रसंग

धर्म डेस्क: फिल्म ‘हनुमान अंश’ का भजन ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। भजन की पंक्तियां भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी से जुड़ी उस लोकप्रिय धार्मिक मान्यता की ओर संकेत करती हैं, जिसमें हनुमान जी के जन्म को भगवान शिव के अंश से जोड़ा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों और लोक परंपराओं में हनुमान जन्म की अलग-अलग कथाएं मिलती हैं, इसलिए किसी एक कथा को सभी ग्रंथों का समान वर्णन मानना उचित नहीं होगा।

भगवान शिव के अंश माने जाते हैं हनुमान
कई धार्मिक परंपराओं में हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार या शिवांश माना गया है। कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने जब श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया, तब उनकी सेवा और धर्म की स्थापना में सहयोग के लिए हनुमान जी का जन्म हुआ।
हनुमान जी की माता अंजनी और पिता वानरराज केसरी माने जाते हैं। उनके जन्म में पवन देव की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण उन्हें पवनपुत्र, वायुपुत्र और मारुति जैसे नामों से भी जाना जाता है।
'पार्वती की जिद' वाली कथा क्या है?
लोकप्रिय पौराणिक कथाओं के एक रूप में कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने श्रीराम की सेवा के लिए वानर रूप में पृथ्वी पर जाने की इच्छा व्यक्त की तो माता पार्वती भी उनके साथ जाने की इच्छा रखने लगीं। इसी प्रसंग को लोककथाओं, भजनों और धार्मिक प्रस्तुतियों में अलग-अलग तरीके से सुनाया जाता है।
कुछ कथाओं में माता पार्वती की इच्छा या आग्रह को हनुमान जी से जुड़े दिव्य स्वरूप के साथ प्रतीकात्मक रूप में जोड़ा गया है। संभवतः ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ जैसी पंक्ति इसी लोकप्रचलित धार्मिक कल्पना को गीतात्मक रूप देती है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हनुमान जन्म की कथा वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, पुराणों और बाद की लोक परंपराओं में एक जैसी नहीं मिलती।
माता अंजनी ने की थी तपस्या
एक प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार माता अंजनी ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या और दैवीय कृपा के परिणामस्वरूप हनुमान जी का जन्म हुआ। दूसरी प्रचलित कथा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त दिव्य खीर के एक अंश और पवन देव की भूमिका से हनुमान जन्म को जोड़ती है।
इसी कारण हनुमान जी को भगवान शिव का अंश होने के साथ पवनपुत्र भी कहा जाता है। उनकी शक्ति, बुद्धि और श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति उन्हें हिंदू परंपरा के सबसे पूजनीय देवताओं में स्थान देती है।
श्रीराम की सेवा बनी जीवन का उद्देश्य
हनुमान जी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष भगवान श्रीराम के प्रति उनका पूर्ण समर्पण है। माता सीता की खोज के लिए समुद्र पार करना, लंका में प्रवेश करना, अशोक वाटिका में माता सीता तक श्रीराम का संदेश पहुंचाना और संजीवनी बूटी लाना उनकी भक्ति और पराक्रम के प्रमुख प्रसंग हैं।
रामायण परंपरा में हनुमान जी शक्ति के साथ विनम्रता, सेवा और निष्ठा के आदर्श माने जाते हैं। यही कारण है कि उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं आज भी भजन, गीत, फिल्मों और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचती हैं।
‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ भजन की लोकप्रियता ने भी हनुमान जी के जन्म से जुड़ी इन प्रचलित कथाओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। धार्मिक दृष्टि से इसे किसी एक प्रमाणित कथा के बजाय विभिन्न लोक और पौराणिक परंपराओं से प्रेरित प्रस्तुति के रूप में समझना बेहतर है।
Next Story