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Google Play Store पर 6 एंटी-वायरस ऐप्स ने 15,000 यूजर्स का डेटा चुरा लिया, पीड़ितों में से अधिकांश इटली और ब्रिटेन के थे

Tulsi Rao
9 April 2022 4:27 PM GMT
Google Play Store पर 6 एंटी-वायरस ऐप्स ने 15,000 यूजर्स का डेटा चुरा लिया, पीड़ितों में से अधिकांश इटली और ब्रिटेन के थे
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डिटेल्स और अन्य व्यक्तिगत जानकारी चुरा रहे थे. प्ले स्टोर पर सभी ऐप्स को 15,000 से अधिक बार डाउनलोड किया गया है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। Google Play Store पर एंटी-मैलवेयर सॉफ्टवेयर के रूप में 6 ऐप्स ने लगभग 15,000 Android यूजर्स का संवेदनशील डेटा चुरा लिया. Google द्वारा उल्लंघन को पहचानने के बाद, उसने Play Store से ऐप्स को स्थायी रूप से हटा दिया है. चेक प्वाइंट रिसर्च की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. तीन शोधकर्ताओं ने पाया कि हैकर्स ने एंटी वायरस एप्लिकेशन की आड़ में शार्कबॉट एंड्रॉइड स्टीलर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया, जिससे वो यूजर्स के पासवर्ड, बैंक डिटेल्स और अन्य व्यक्तिगत जानकारी चुरा रहे थे. प्ले स्टोर पर सभी ऐप्स को 15,000 से अधिक बार डाउनलोड किया गया है.

क्या कहा गया रिपोर्ट में?

चेक प्वाइंट रिपोर्ट के अनुसार, 'यह मैलवेयर एक जियोफेंसिंग फीचर और चोरी की तकनीक को लागू करता है, जो इसे बाकी मालवेयर से अलग बनाता है. यह Domain Generation Algorithm (DGA) नामक किसी चीज का भी उपयोग करता है, जो कि एंड्रॉइड मैलवेयर की दुनिया में शायद ही कभी इस्तेमाल किया गया हो.'

Google Play Store पर इन ऐप्स ने चुरा लिया यूजर्स का पर्सनल डेटा

एंटी वायरस के रूप में छह मैलवेयर ऐप्स ने 15,000 से अधिक यूजर्स को शार्कबॉट एंड्रॉइड मैलवेयर से इंफेक्टेड किया, जो क्रेडेंशियल और बैंकिंग जानकारी चुराता है. शोध के दौरान, एंफेक्टेड डिवाइस के लगभग 1,000 आईपी पते खोजे गए. पीड़ितों में से अधिकांश इटली और यूनाइटेड किंगडम से थे.

इन 6 ऐप्स को Google Play Store से हटाया गया

ये वो छह ऐप हैं, जो Google Play Store से हटा दिए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, 'शार्कबॉट हर संभावित शिकार को टारगेट नहीं करता है, लेकिन चीन, भारत, रोमानिया, रूस, यूक्रेन या बेलारूस के यूजर्स की पहचान करने और उन्हें अनदेखा करने के लिए जियो-फेंसिंग सुविधा का उपयोग करके केवल चुनिंदा लोगों को टारगेट करता है.' ऐप इंस्टॉल करते ही क्रेडेंशियल एंट्री फॉर्म में लोगों से जरूरी चीजें भरवाई जाती हैं. जैसे ही यूजर्स क्रेडेंशियल्स इनपुट करते हैं, तो डेटा हैकर्स तक ट्रांसफर हो जाता है.

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