धर्म-अध्यात्म

दिल्ली के 5 प्रसिद्ध मंदिर जो भक्तों की अटूट आस्था का हैं केंद्र

Manish Sahu
3 Sep 2023 10:26 AM GMT
दिल्ली के 5 प्रसिद्ध मंदिर जो भक्तों की अटूट आस्था का हैं केंद्र
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धर्म अध्यात्म: भगवान स्वामीनारायण को समर्पित नई दिल्ली में स्थित अक्षरधाम मंदिर भारत के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर में से एक है. अक्षरधाम मंदिर को स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर भी कहा जाता है. दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है अक्षरधाम मंदिर. यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है. देखने में काफी आकर्षक होने के कारण यहां साल के 12 महीने लोगों की भीड़ लगी रहती है.
कहते हैं कि मध्यकालीन समय में तुलसीदास जी ने भी अपने दिल्ली यात्रा के समय इस मंदिर के दर्शन किये थे. इस हनुमान मंदिर के वर्तमान इमारत का निर्माण आंबेर के महाराजा मान सिंह प्रथम (1540-1614) ने मुगल सम्राट अकबर के शासन काल में कराया था. इसका विस्तार महाराजा जयसिंह द्वितीय (1688-1743) ने जंतर मंतर के साथ ही करवाया था. इसके बाद भी इमारत में समय-समय पर सुधार, बदलाव आदि होते रहे हैं.
छतरपुर मंदिर गुंड़गांव-महरौली मार्ग के पास छतरपुर इलाके में स्थित है. यह मंदिर दिल्ली के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में एक है. यह मंदिर माता कात्यायनी को समर्पित है, इसलिए इसका नाम भी कात्यायनी शक्तिपीठ रखा गया है. इस मंदिर की स्थापना कर्नाटक के संत बाबा नागपाल जी ने की थी. मंदिर का शिलान्यास सन 1974 में श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ द्वारा किया गया था. यह मंदिर लगभग 70 एकड़ में फैला हुआ है.
झण्डेवालान माता मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक है. मान्यता है कि यहां लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. यहां बड़ी संख्या में भक्तजन माता रानी के दर्शन करने के लिए आते हैं. खासतौर से नवरात्र में यहां भक्तों की भीड़ काफी ज्यादा बढ़ जाती है. इस मंदिर के बारे में ऐसी पौराणिक कथा है कि मंदिर की स्थापना से पहले इस स्थान पर काफी शांत वातावरण रहता था,जिस कारण कई लोग यहां प्रशिक्षण करने के लिए आते थे.
कालकाजी मंदिर: राजधानी दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक है कालकाजी का मंदि, जिसका निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था. यह मंदिर दक्षिणी दिल्ली के कालका जी में स्थित है. इसे मनोकामना सिद्धपीठ और जयंती काली पीठ भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि असुरों द्वारा देवताओं को सताए जाने पर ब्रह्मा जी की सलाह से देवताओं ने यहां शिवा यानी शक्ति की आराधना की थी.
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