धर्म-अध्यात्म

27 या 28 सितंबर, कब है अनंत चतुर्दशी? इस शुभ मुहुर्त में करें पूजा मिलेगा लाभ

Tara Tandi
27 Sep 2023 7:43 AM GMT
27 या 28 सितंबर, कब है अनंत चतुर्दशी? इस शुभ मुहुर्त में करें पूजा मिलेगा लाभ
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हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को का पर्व मनाया जाता है. यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अंनत रूप की पूजा जाती है. साथ ही इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है. अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखा जाता है और 14 गांठ वाले सूत्र हाथों मे बांधा जाता है. मान्यता है कि इसे बांधने से सारे संकट दूर जाते हैं साथ ही घर में सुख-समृद्धि और खुशियों का आगमन होता है. ज्योतिषियों की मानें तो अनंत चतुर्दशी के दिन विष्णु जी ने 14 लोकों की रक्षा के लिए 14 रूप धारण किए थे. आइए जानते हैं इस साल कब है अनंत चतुर्दशी, साथ ही जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त.
कब है अनंत चतुर्दशी? (When is Anant Chaturdarshi 2023)
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल अनंत चतुर्दशी का पर्व 28 सितंबर 2023 को मनाया जाएगा. अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है.
अनंत चतुर्दशी पूजा शुभ मुहूर्त (Anant Chaturdarshi 2023 Puja Shubh Muhurat)
अनंत चतुर्दशी तिथि प्रारंभ - 27 सितंबर 2023 को रात 10 बजकर 18 मिनट से
अनंत चतुर्दशी तिथि समापन - 28 सितंबर 2023 को शाम 06 बजकर 49 मिनट पर
अनंत चतुर्दशी 2023 पर गणेश विसर्जन का मुहूर्त (Ganpati Visarjan Time)
28 सितंबर 2023 को गणपति विसर्जन के लिए तीन शुभ मुहूर्त हैं. पहला मुहूर्त सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 40 मिनट तक, दूसरा मुहूर्त - सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक, तीसरा मुहूर्त - शाम 4 बजकर 41 मिनट से रात 9 बजकर 10 मिनट तक
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि (Anant Chaturdashi 2023 Puja Vidhi)
अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि कर लें. उसके बाद व्रत का संकल्प लें. फिर पूजा घर में गंगाजल से छिड़काव करके कलश स्थापना करें. साथ में भगवान विष्णु की तस्वीर रखें. इसके बाद कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर सूत्र तैयार करें फिर इसमें 14 गांठ बांध लें. उसके बाद इसे भगवान विष्णु को अर्पित कर दें. अब भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें. उसके बाद अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा पढ़ें और आखिरी में आरती करें. जब पूजा समाप्त हो जाए तो अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें. पुरुष दांए हाथ में जबकि महिलाएं बाएं हाथ में अंनत सूत्र बांधे.
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