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धर्म-अध्यात्म
गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चों के लिए 27 दिन तक पिता से दूरी और 'Sataisa' पूजा का महत्व
Harrison
15 Jan 2026 7:12 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म: भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कोई बच्चा गंडमूल नक्षत्र में जन्म लेता है तो उसके पिता को जन्म के तुरंत बाद 27 दिनों तक बच्चे की सूरत नहीं देखनी चाहिए। इस परंपरा का पालन धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के कारण किया जाता है। कहा जाता है कि गंडमूल नक्षत्र वाले बच्चों के जीवन में प्रारंभिक दिनों में नक्षत्रों की भारी ऊर्जा हो सकती है, जो बच्चे और परिवार दोनों पर असर डाल सकती है।
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, पिता और बच्चे के बीच प्रारंभिक संपर्क में यह समय बच्चों के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान पिता बच्चे से दूरी बनाए रखते हैं और केवल आवश्यक देखभाल ही करते हैं। यह परंपरा परिवार के बड़े बुजुर्गों और पंडितों के मार्गदर्शन में पालन की जाती है।
27वें दिन बच्चे के लिए विशेष पूजा 'सतैसा' का आयोजन किया जाता है। सतैसा पूजा का उद्देश्य नक्षत्रों के प्रभाव को संतुलित करना और बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा करना है। इस पूजा में पवित्र जल, गंगा जल, दीप, मंत्र और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य इस अवसर पर बच्चे के लिए मंगलकामनाएं करते हैं और धार्मिक रस्मों का पालन करते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से, गंडमूल नक्षत्र वाले बच्चों को जीवन में शुरुआती वर्षों में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इस अवधि में माता-पिता को बच्चे की सेहत और मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। साथ ही यह माना जाता है कि इस अवधि में किए गए धार्मिक उपाय बच्चे के जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने में सहायक होते हैं।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि सतैसा पूजा में माता-पिता का आशीर्वाद और परिवार का सहयोग बच्चे के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पूजा के बाद पिता बच्चे से संपर्क कर सकते हैं और पारिवारिक जीवन में सामान्य गतिविधियों को पुनः शुरू किया जा सकता है।
इस परंपरा का पालन केवल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक अनुशासन को भी बढ़ावा देता है। कई परिवारों में इस प्रथा का पालन पीढ़ियों से होता आ रहा है और इसे बच्चों की सुरक्षा और शुभारंभ के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चों के लिए सतैसा पूजा और शुरुआती 27 दिनों की दूरी से मानसिक और शारीरिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार, यह परंपरा धार्मिक विश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का काम करती है।
कुल मिलाकर, गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चों के लिए 27 दिनों की दूरी और सतैसा पूजा की परंपरा बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और परिवार की सुख-शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है।
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