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- जानिए जन्माष्टमी पर...

भाद्रपद महीने की अष्टमी भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है. जन्माष्टमी कहलाने वाले इस पर्व पर देशभर में आस्था व उल्लास का माहौल रहता है. घरों से लेकर मंदिरों तक में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है तो जगह-जगह श्रीकृष्ण लीलाओं का मंचन व मटकी फोड़ कार्यक्रम होते हैं. भगवान श्रीकृष्ण को रिझाने के लिए तरह- तरह की पूजा- आराधना भी होती है. इस बीच आज पंडित इंद्रमणि घनस्याल आपको जन्माष्टमी पर एक विशेष परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं. जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में बहुत महत्वपूर्ण व श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है. ये परंपरा नाल छेदन की है. जिसमें खीरे का विशेष महत्व है.
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस है. ऐसे में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते समय उनकी भी नाल छेदन की परंपरा है. जो खीरे से की जाती है. इसके लिए डंठल और हल्की पत्तियां लगे खीरे का उपयोग किया जाता है. जिसके डंठल को नाल की तरह काटकर मां देवकी के गर्भ से बंधे श्रीकृष्ण का नाल छेदन किया जाता है.





