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भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे श्रीलंका
jantaserishta.com
17 April 2026 1:18 PM IST

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नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दो दिवसीय दौरे पर श्रीलंका जाएंगे। उपराष्ट्रपति का ये दो दिवसीय दौरा 19-20 अप्रैल 2026 को होगा। यह भारत के उपराष्ट्रपति का श्रीलंका का पहला द्विपक्षीय दौरा होगा।
अपने दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका से मिलेंगे। इसके अलावा, वह श्रीलंका के प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या से भी मुलाकात करेंगे। वहीं दूसरे बड़े लोगों और भारतीय समुदाय के नेताओं से भी मिलेंगे।
श्रीलंका भारत के विजन महासागर और उसकी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी में एक अहम साझेदार है। उपराष्ट्रपति का श्रीलंका दौरा दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई उच्च स्तरीय मीटिंग के बाद हो रहा है और इससे भारत और श्रीलंका के बीच हजारों साल पुराने लोगों के बीच के संबंध और मजबूत होंगे।
बता दें, पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से काफी तनाव का माहौल बना हुआ है। इसकी वजह से तेल के संकट भी मंडरा रहा है। इस बीच पिछले महीने मार्च में भारत ने मदद के लिए भारत ने श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन फ्यूल भेजा।
भारत की तरफ से भेजे गए इस मदद के लिए श्रीलंकाई नेता ने आभार जताया। सांसद और श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के राष्ट्रीय आयोजक और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे ने श्रीलंकाई सरकार को फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट जैसे मॉडल पर काम करने की सलाह दी। उन्होंने भारत की नीतियों की खूब सराहना की।
नमल राजपक्षे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों ने एक बार फिर श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम की समय पर शिपमेंट करके नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी को बनाए रखा है। भारत हमेशा संकट के समय में श्रीलंका के लिए सबसे पहले खड़ा रहा है। जरूरी सप्लाई से लेकर आर्थिक मदद तक, जो उसकी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सच्ची झलक है। एक क्षेत्र के तौर पर यह जरूरी है कि देश क्षेत्र की बेहतरी के लिए रणनीतिक साझेदार के तौर पर मिलकर काम करें।"
उन्होंने श्रीलंकाई सरकार से भारत का मॉडल अपनाने की सलाह दी और कहा कि हम श्रीलंका सरकार से अपील करते हैं कि वह भारत के हालिया फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट जैसे मॉडल पर विचार करे। भारत ने एक्साइज ड्यूटी इसलिए कम नहीं की, ताकि कीमतें तुरंत कम हों, बल्कि मार्केट को स्थिर करने और ग्लोबल तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान और बढ़ोतरी को रोकने के लिए ऐसा किया।
नमल राजपक्षे ने कहा, "जैसे-जैसे श्रीलंका आगे बढ़ेगा, सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों को भी मजबूत करना होगा। हालांकि फिस्कल डिसिप्लिन जरूरी है, लेकिन भारत के ज्यादा ग्रोथ ओरिएंटेड अप्रोच में देखा गया ज्यादा टैक्स बोझ कम करने से निवेश को बढ़ावा देने, नागरिकों पर दबाव कम करने और लंबे समय की रिकवरी में मदद मिल सकती है।"
वहीं भारत सरकार के इस सकारात्मक रुख पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि कुछ दिन पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बात हुई थी। इस बातचीत में उन्होंने (दिसानायके) मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण श्रीलंका को हो रही फ्यूल सप्लाई में आ रही रुकावटों को बयां किया था। भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं।
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