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फर्श से अर्श तक अरशद वारसी: अनाथ हुए लेकिन नहीं हारी हिम्मत, आज हैं बॉलीवुड के 'कॉमेडी किंग'

jantaserishta.com
18 April 2026 2:18 PM IST
फर्श से अर्श तक अरशद वारसी: अनाथ हुए लेकिन नहीं हारी हिम्मत, आज हैं बॉलीवुड के कॉमेडी किंग
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मुंबई: 'मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.' का सर्किट का किरदार हो या 'गोलमाल' सीरीज के माधव, कॉमेडी के मामले में अरशद वारसी को टक्कर दे पाना बहुत मुश्किल है। इन दोनों ही किरदारों ने अरशद की जिंदगी बदल दी, लेकिन एक समय ऐसा था, जब अभिनेता ने सब कुछ खो दिया था और उनकी दुनिया पूरी तरीके से बदल गई थी।
19 अप्रैल को मुंबई में जन्मे अरशद वारसी के लिए हिंदी सिनेमा में पैर जमाना आसान नहीं था, और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे एक्टिंग की दुनिया में कदम रखेंगे, लेकिन कहते हैं कि भाग्य में जहां जाना लिखा होता है, वहां के दरवाजे आपके लिए खुलते ही चले जाते हैं। अभिनेता के साथ भी वैसा ही हुआ। माता-पिता की बीमारी और उनके असमय छोड़कर जाने की वजह से अरशद ने छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया था।
अरशद ने खुद खुलासा करते हुए बताया था कि उनके पिता एक अच्छे बिजनेसमैन नहीं थे और उन्होंने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया था। अभिनेता के पिता ने सारा पैसा बिजनेस में डूबा दिया और बोन कैंसर से जूझने लगे, जबकि मां किडनी की बीमारी से ग्रसित थी। हर हफ्ते मां का डायलिसिस होता था और घर में सेविंग के नाम पर कुछ नहीं था। उन्होंने कहा था, "उस वक्त मैं कोरियोग्राफर था। गाने कोरियोग्राफ और प्ले करता था। मेरी सारी कमाई मां के एक हफ्ते के डायलिसिस पर खर्च हो जाती थी। हर हफ्ते यही प्रक्रिया दोबारा होनी थी। उस वक्त लगा कि क्या जिदंगी है, एक छोटे से घर में जिंदगी बिताना।
माता-पिता के निधन ने अभिनेता को तोड़ दिया था, क्योंकि कोई आस-पास नहीं था, जो मदद कर सके। उसी पल ने अरशद वारसी को एक रात में बड़ा कर दिया था। अरशद वारसी ने बचपन में माता-पिता के साथ गहरा लगाव महसूस नहीं किया था क्योंकि वे बोर्डिंग स्कूल में पढ़े थे। अभिनेता इतना अकेला महसूस करते थे, खुद को चिट्ठियां लिखते थे और अपने दोस्तों से डाक के जरिए पोस्ट कराते थे।
एक पुराने इंटरव्यू में अभिनेता ने बताया था कि मुझे वो लोग समझ नहीं आते, जो कहते हैं कि वे अपने माता-पिता के बिना नहीं रह सकते। कभी-कभी उनके माता-पिता उनकी छुट्टियां भूल जाते थे, जिसकी वजह से उन्हें स्कूल में ही छोड़ दिया जाता था जबकि बाकी बच्चे घर चले जाते थे। वे खुद को चिट्ठियां भी लिखते थे। मैं साल में सिर्फ दो बार घर जाता था।
इतना सब झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और जया बच्चन की वजह से फिल्मों में एंट्री ली। अभिनेता की पहली फिल्म थी तेरे मेरे सपने। यह फिल्म अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल बैनर के तले बनी थी, जिसके बाद अभिनेता 'बेताबी,' 'मेरे दो अनमोल रत्न,' और 'हीरो हिंदुस्तानी' जैसी फिल्मों में दिखे, लेकिन सर्किट के किरदार ने सिनेमा में उन्हें जीवनदान दिया।
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