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जीवंत लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक और आवश्यक होते हैं : सीपी राधाकृष्णन

jantaserishta.com
17 April 2026 2:52 PM IST
जीवंत लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक और आवश्यक होते हैं : सीपी राधाकृष्णन
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नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित होने पर बधाई दी। राधाकृष्णन ने कहा कि हरिवंश का निर्विरोध चुना जाना मात्र एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इस सदन के सभी दलों और वर्गों के बीच उनके प्रति गहरे विश्वास, सम्मान और भरोसे की सशक्त अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार इस उच्च संवैधानिक पद पर उनका पुनर्निर्वाचन अपने आप में एक विशिष्ट उपलब्धि है। यह केवल निरंतरता ही नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निष्पादन में निष्पक्षता, संयम और लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। पीठासीन अधिकारी के रूप में हरिवंश का कार्यकाल सदैव गंभीरता, संतुलन और शांत लेकिन प्रभावशाली नेतृत्व से परिपूर्ण रहा है।
सभापति ने कहा कि वे सदन की सामूहिक बुद्धिमत्ता की सराहना करना चाहते हैं, जिसने उनको सर्वसम्मति से चुना। एक जीवंत लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक और आवश्यक होते हैं, क्योंकि वे हमारी चर्चाओं को समृद्ध बनाते हैं। किंतु ऐसे क्षण, जब पूरा सदन एक स्वर में निर्णय लेता है, यह दर्शाते हैं कि हम सभी संसद की गरिमा, मर्यादा और संस्थागत सुदृढ़ता के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं।
उपसभापति चुने जाने के बाद हरिवंश ने सबसे पहले राष्ट्रपति के प्रति सम्मानपूर्वक आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने नई दिशा पाई है। उन्होंने कहा कि नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा व नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता के साथ इस सदन में कार्य करना सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि हम सभी इस सदन में सहयोगी हैं। लोकतंत्र में स्वस्थ वैचारिक प्रतिस्पर्धा का अधिकार है, परंतु कटुता का कोई स्थान नहीं है। सदन के नियमों के अंतर्गत हर विषय उठाने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं और हम सभी ने स्वेच्छा से इन नियमों का पालन करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि वह सदन को आश्वस्त करना चाहते हैं कि संविधान, संसदीय नियमों और परंपराओं के दायरे में रहते हुए सदन की गरिमा, सदस्यों के अधिकारों और सहभागिता तथा सदन के समक्ष प्रस्तुत सभी कार्यों के सुचारु संचालन के लिए पूर्ण निष्ठा से कार्य करेंगे। आज 17 अप्रैल को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के जन्मशती वर्ष का भी आरंभ हो रहा है। उनकी प्रेरणादायी स्मृति को वह नमन करते हैं। साथ ही, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के प्रति भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
राज्यसभा में नेता सदन व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि आज का दिन विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है, जो इस सदन की एकता और परिपक्व लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाता है। सभी दलों के नेताओं ने जिस प्रकार हरिवंश जी के बहुआयामी व्यक्तित्व को सामने रखा, उससे यह स्पष्ट है कि वे केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक समर्पित और सम्मानित सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं।
नड्डा ने कहा कि हरिवंश जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव ईमानदारी, बौद्धिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। चाहे वह पत्रकारिता का क्षेत्र हो या संसदीय जीवन, उन्होंने अपने विचारों में स्पष्टता, संतुलन और समन्वय का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने जनचर्चा को दिशा दी, और एक सांसद के रूप में सदन की गरिमा को बनाए रखा।
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