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जातिगत जनगणना पर केंद्र की हरी झंडी, टीएस सिंह देव बोले- रंग लाई विपक्ष की मेहनत

jantaserishta.com
1 May 2025 8:25 AM IST
जातिगत जनगणना पर केंद्र की हरी झंडी, टीएस सिंह देव बोले- रंग लाई विपक्ष की मेहनत
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भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने को मंजूरी दे दी। कैबिनेट के इस निर्णय के बाद देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री टीएस सिंह देव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका की जीत बताया।
टीएस सिंह देव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह मेरे लिए संतोष और खुशी की बात है कि राहुल गांधी और उनके सहयोगियों द्वारा लंबे समय से उठाया गया मुद्दा अब साकार रूप ले रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में कितनी अहम होती है। अगर कोई बात सही है और उसे लगातार उठाया जाए, तो वह सत्ता पक्ष को भी उस पर विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है, चाहे वे उसे मन से स्वीकार करें या अनचाहे मन से।
बिहार चुनाव से ठीक पहले यह फैसला लेकर क्या सरकार वोटरों को प्रभावित करना चाहती है? इस सवाल के जवाब में कांग्रेस नेता ने कहा कि यह संभव है, बिल्कुल संभव है। बिहार में पहले नीतीश कुमार की सरकार ने जातिगत जनगणना की पहल की थी और आज वह भाजपा के साथ सरकार में हैं। ऐसे में अगर केंद्र सरकार यह फैसला नहीं लेती, तो इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
टीएस सिंह देव ने आगे कहा कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य किसी भी प्रकार का भेदभाव फैलाना नहीं है। हम सब एक हैं, चाहे जाति हो या धर्म। हम सब भारतीय हैं। यह जनगणना केवल समाज की वर्तमान स्थिति को समझने की एक प्रक्रिया है, ताकि सरकारें नीतियों का निर्माण करते समय यह जान सकें कि कौन-से वर्ग या क्षेत्र अभी भी विकास से वंचित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1931 के बाद आखिरी बार 2012 में जातिगत आंकड़े जुटाए गए थे, लेकिन उनके परिणाम प्रकाशित नहीं हुए। जब सरकार खर्च करती है, तो यह जानना जरूरी है कि किन क्षेत्रों में या किन सामाजिक समूहों में ज्यादा जरूरत है।
धार्मिक और जातीय आधार पर देश को बांटने की कोशिशों पर टिप्पणी करते हुए सिंह देव ने कहा कि कुछ लोग धर्म की बात उठाते हैं। लेकिन, असलियत यह है कि जब आतंकवादियों ने पहलगाम में धर्म का इस्तेमाल विभाजन के लिए किया, तब पूरा देश एकजुट होकर खड़ा हो गया। जातिगत जनगणना भी ऐसा ही एक प्रयास है, जहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और समावेश की दिशा में एक कदम है। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी द्वारा लंबे समय से उठाया गया न्याय का मुद्दा अब साकार होता दिख रहा है। आज न्याय की जीत हुई है। जातिगत जनगणना समाज में संतुलन और समानता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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