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विश्‍व रेड क्रॉस डे: युद्ध से आपदा तक, हर मुश्किल में साथ खड़े स्वयंसेवकों को सलाम

jantaserishta.com
7 May 2026 10:20 AM IST
विश्‍व रेड क्रॉस डे: युद्ध से आपदा तक, हर मुश्किल में साथ खड़े स्वयंसेवकों को सलाम
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नई दिल्ली: जब भी दुनिया किसी संकट से गुजरती है, तो रेड क्रॉस के स्वयंसेवक जरूरतमंदों के साथ खड़े नजर आते हैं। कहीं युद्ध छिड़ता है, कहीं भूकंप आता है, कहीं बाढ़ या तूफान तबाही मचाते हैं, तो ऐसे मुश्किल समय में वे अपनी परवाह किए बिना दूसरों की मदद के लिए सबसे पहले आगे आते हैं। मानवता के प्रति इनके समर्पण के सम्मान और उसे बढ़ावा देने के लिए हर साल 8 मई को विश्‍व रेड क्रॉस दिवस मनाया जाता है।
साल 2026 में इस दिवस की थीम है "मानवता में एकता"। यह थीम सिर्फ एक संदेश नहीं बल्कि आज की दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत भी है। दुनिया तेजी से बदल रही है। युद्ध, जलवायु परिवर्तन, महामारी, विस्थापन और प्राकृतिक आपदाएं लोगों की जिंदगी को लगातार प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में रेड क्रॉस के स्वयंसेवक लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। वे किसी धर्म, जाति, भाषा या देश के आधार पर फर्क नहीं करते बल्कि सिर्फ इंसानियत के नाते मदद पहुंचाते हैं।
रेड क्रॉस की सबसे बड़ी ताकत उसके स्वयंसेवक हैं। ये लोग सिर्फ राहत सामग्री बांटने का काम नहीं करते, बल्कि मुश्किल में फंसे लोगों को मानसिक सहारा भी देते हैं। जब किसी का घर उजड़ जाता है, परिवार बिछड़ जाता है या जीवन पूरी तरह बदल जाता है, तब एक मदद का हाथ और कुछ भरोसे भरे शब्द किसी के लिए नई उम्मीद बन जाते हैं। यही वजह है कि रेड क्रॉस को दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन में से एक माना जाता है।
विश्‍व रेड क्रॉस दिवस सिर्फ सेवा कार्यों का जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन लोगों को याद करने का भी अवसर है जिन्होंने दूसरों की मदद करते हुए अपनी जान गंवाई। दुनिया के कई संघर्ष क्षेत्रों और आपदा प्रभावित इलाकों में राहत कार्य करना आसान नहीं होता। कई बार स्वयंसेवकों को अपनी जान का खतरा उठाकर लोगों तक पहुंचना पड़ता है। इसके बावजूद वे पीछे नहीं हटते क्योंकि उनके लिए मानवता सबसे ऊपर होती है।
रेड क्रॉस आंदोलन के संस्थापक हेनरी डुनेंट के जन्मदिन यानी 8 मई को यह दिवस मनाया जाता है। हेनरी डुनेंट ने युद्ध में घायल सैनिकों की हालत देखकर मानव सेवा का जो सपना देखा था, वही आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। साल 1948 में पहली बार इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस दिवस के रूप में मनाया गया था और बाद में 1984 में इसका नाम बदलकर 'विश्व रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट दिवस' कर दिया गया।
आज रेड क्रॉस सिर्फ युद्ध या आपदा के समय ही काम नहीं करता, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं, रक्तदान अभियान, प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और सामुदायिक सहायता जैसे कई क्षेत्रों में भी सक्रिय है। कोरोना महामारी के दौरान भी दुनिया ने देखा कि कैसे रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों ने अस्पतालों, क्वारंटीन सेंटरों और गांव-शहरों में जाकर लोगों की मदद की। उस कठिन दौर में उन्होंने साबित कर दिया कि मानवता और सेवा की भावना किसी भी संकट से बड़ी होती है।
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