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कर्नाटक में वक्फ भूमि विवाद फिर गरमाया, भाजपा ने किसानों की जमीन खतरे में डालने का लगाया आरोप

jantaserishta.com
29 Jun 2026 12:41 PM IST
कर्नाटक में वक्फ भूमि विवाद फिर गरमाया, भाजपा ने किसानों की जमीन खतरे में डालने का लगाया आरोप
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बेंगलुरु: कर्नाटक में वक्फ जमीन से जुड़ा राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है। वरिष्ठ भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार पूरे राज्य में जमीन के रिकॉर्ड में वक्फ से जुड़ी एंट्रीज दर्ज करके किसानों के जमीन के अधिकारों को खतरे में डाल रही है।
सोमवार को जारी एक बयान में अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की "तुष्टिकरण की राजनीति" उस स्तर पर पहुंच गई है, जहां यह किसानों के अस्तित्व के लिए ही खतरा बन गई है। उन्होंने दावा किया कि 'रिकॉर्ड ऑफ राइट्स, टेनेसी एंड क्रॉप्स' (आरटीसी) यानी दस्तावेजों के कॉलम 11 में वक्फ का जिक्र होने की खबरों से लाखों किसानों में भारी चिंता पैदा हो गई है।
इसे "सिर्फ रिकॉर्ड में बदलाव का मामला नहीं, बल्कि मालिकाना हक, रोज़ी-रोटी और किसानों के भविष्य का सवाल" बताते हुए अशोक ने राज्य सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की। भाजपा नेता के अनुसार, 1.80 लाख से ज़्यादा आरटीसी में पहले ही वक्फ से जुड़ी एंट्रीज की जा चुकी हैं, जबकि यह प्रक्रिया लगभग तीन लाख जमीन के रिकॉर्ड तक बढ़ाई जा रही है। कर्नाटक के सभी 31 जिलों के किसान इससे प्रभावित हो सकते हैं।
अशोक ने इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर करने के लिए जिलेवार आंकड़े पेश किए। कारवार में लगभग 73,000, मंगलुरु में 48,000, शिवमोग्गा में 38,000, बेंगलुरु दक्षिण में 18,000, कलबुर्गी में 17,000 और बागलकोट में 17,000 आरटीसी में ऐसी एंट्रीज हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को संबोधित करते हुए अशोक ने कहा कि अगर रिपोर्ट गलत हैं, तो सरकार को तुरंत लोगों के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। हालांकि, अगर किसानों के आरटीसी में वाकई ऐसी एंट्रीज की गई हैं, तो सरकार को जवाब देना चाहिए। किसानों को उनकी अपनी जमीन को लेकर अनिश्चितता में क्यों धकेला जा रहा है।
सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए अशोक ने पूछा कि क्या इन एंट्रीज की वजह से किसानों को अपनी जमीन बेचने, बैंक लोन लेने या मालिकाना हक का इस्तेमाल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर किसानों के कल्याण के बजाय तुष्टिकरण की राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया।
अशोक ने कहा, "किसान देश का पेट भरता है। उसी किसान को अपनी ही जमीन का मालिकाना हक साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगवाना 'अन्नदाता' के श्राप को न्योता देने जैसा है।"
विपक्ष के नेता ने तुरंत दखल देने की मांग करते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह पूरी प्रक्रिया रोक दे, आरटीसी में वक्फ से जुड़ी सभी एंट्रीज की समीक्षा करे और इस मुद्दे पर जनता के सामने एक श्वेत पत्र जारी करे।
अशोक ने कहा, "जहां तक ​​किसानों की जमीन का सवाल है, इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता। अगर कोई किसानों की जमीन पर बुरी नजर डालता है, तो कर्नाटक की जनता उसे मुंहतोड़ जवाब देगी।"
हाल के वर्षों में कर्नाटक में वक्फ जमीन का मुद्दा बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बना है। भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि वक्फ रिकॉर्ड के तहत किसानों की जमीन पर दावा किया जा रहा है जबकि कांग्रेस सरकार का कहना है कि किसी भी किसान के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ेगा और किसी भी गड़बड़ी की जांच कानून के मुताबिक की जाएगी। अशोक के ताजा बयानों ने इस विवादित मुद्दे को एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
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