न्यूज

दलाई लामा के बाद भी तिब्बत समर्थन जारी रखने के पक्ष में अमेर‍िका, पेश क‍िया नया ब‍िल

jantaserishta.com
27 May 2026 10:38 AM IST
दलाई लामा के बाद भी तिब्बत समर्थन जारी रखने के पक्ष में अमेर‍िका, पेश क‍िया नया ब‍िल
x
वाशिंगटन: अमेरिका के दो प्रभावशाली लॉमेकर्स ने एक नया बिल पेश किया है, जिसका मकसद 14वें दलाई लामा के निधन के बाद भी तिब्बती लोगों और सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) के साथ अमेरिका की भागीदारी और समर्थन जारी रखना है। माना जा रहा है कि इस कदम पर बीजिंग और भारत में रह रहे तिब्बती समुदाय दोनों की खास नजर रहेगी।
इस द्विदलीय बिल का नाम 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट ऑफ 2026' है। इसे कांग्रेसमैन जेम्स पी. मैकगवर्न और माइकल मैककॉल ने पेश किया है।
इस कानून का उद्देश्य तिब्बती लोगों के मानवाधिकारों, आत्मनिर्णय के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए अमेरिका के समर्थन को और मजबूत करना है। साथ ही, भारत के धर्मशाला में स्थित सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के साथ लगातार संपर्क और सहयोग बनाए रखने की बात भी इसमें कही गई है।
मैकगवर्न ने बयान में कहा, “कांग्रेस की लंबे समय से इस बात में गहरी रुचि रही है कि तिब्बत और चीन के बीच विवाद का समाधान निकले।”
उन्होंने कहा क‍ि दुर्भाग्य से दलाई लामा हमेशा हमारे बीच नहीं रहेंगे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिकी सरकार के पास तिब्बती लोगों के मूल मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहने की ताकत और साधन बने रहें। इसके लिए जरूरी है कि हम सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन को तिब्बती लोगों के वैध और लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधि के तौर पर समर्थन दें।
मैककॉल ने कहा कि यह बिल उन तिब्बतियों के लिए अमेरिका के लंबे समय तक समर्थन को मजबूत करेगा, जो बीजिंग के दबाव का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा क‍ि दलाई लामा और उनके लोगों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के उत्पीड़न से बचकर कठिन रास्तों से भारत आए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज भी सीसीपी तिब्बतियों की आस्था और आजादी को दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, “जब मैं धर्मशाला गया था, तब मैंने परम पावन दलाई लामा से वादा किया था कि अमेरिका हमेशा तिब्बतियों के आत्मनिर्णय की लड़ाई में उनके साथ खड़ा रहेगा। मुझे इस अहम बिल का समर्थन करने पर गर्व है, जो तिब्बती लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को स्थायी रूप से मजबूत करेगा और उनके लोकतांत्रिक नेतृत्व के साथ अटूट संबंध सुनिश्चित करेगा।”
इस बिल में कहा गया है कि अमेरिका की आधिकारिक नीति यह होनी चाहिए कि वह तिब्बती लोगों के साथ सीधे संपर्क बनाए रखे, साथ ही उनके लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेतृत्व और धार्मिक एवं सांस्कृतिक नेताओं के माध्यम से भी जुड़ा रहे।
बिल में यह भी कहा गया है कि सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन, दलाई लामा की ओर से स्थापित तिब्बती शासन व्यवस्था की निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रस्तावित कानून में अमेरिकी सरकार को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन को ऑब्जर्वर स्टेटस दिलाने की कोशिश करे।
बिल में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तिब्बती लोगों को जो आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए था, उससे उन्हें वंचित रखा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि गदेन फोड्रंग ट्रस्ट ही दलाई लामाओं की पहचान और मान्यता तय करने वाला 'वैध और एकमात्र अधिकार' है।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story