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संयुक्त राष्ट्र ने युगांडा में इबोला से निपटने के प्रयासों में मदद को 40 लाख अमेरिकी डॉलर किए आवंटित

jantaserishta.com
19 Jun 2026 12:20 PM IST
संयुक्त राष्ट्र ने युगांडा में इबोला से निपटने के प्रयासों में मदद को 40 लाख अमेरिकी डॉलर किए आवंटित
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संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत समन्वयक के अवर महासचिव टॉम फ्लेचर ने युगांडा में इबोला के खिलाफ सरकार की प्रतिक्रिया को समर्थन देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (सीईआरएफ) से 40 लाख अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने दी।
इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन और यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर जांच (स्क्रीनिंग), निगरानी और आवागमन प्रबंधन को मजबूत कर रहे हैं, जबकि यूनिसेफ सामुदायिक सहभागिता, जोखिम संबंधी जागरुकता और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में सहयोग कर रहा है।
इसके अलावा, विश्व खाद्य कार्यक्रम ने मरीजों, पृथकवास (आइसोलेशन) में रखे गए संपर्कों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को 6,000 से अधिक भोजन पैकेट उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, संगठन आवश्यक राहत एवं चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर रहा है।
इस बीच, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने इस सप्ताह 16 मीट्रिक टन से अधिक चिकित्सा सामग्री पहुंचाई। दुजारिक के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के साझेदारों ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एनजिली इंटरनेशनल एयरपोर्ट किंशासा में नई स्वास्थ्य जांच सुविधाएं भी स्थापित की हैं।
संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक से परामर्श के बाद जूलियन हार्नेस को वरिष्ठ इबोला समन्वयक नियुक्त किया है। दुजारिक के अनुसार, उनका दायित्व इबोला प्रतिक्रिया से जुड़े विभिन्न प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, परिचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता को यथासंभव शीघ्र पहुंचाना होगा।
इबोला, जिसे इबोला वायरस रोग भी कहा जाता है, एक दुर्लभ लेकिन अक्सर घातक रक्तस्रावी बुखार (हेमरेजिक फीवर) है, जो ऑर्थोइबोलावायरस के कारण होता है। यह मुख्य रूप से उप सहारा अफ्रीका में पाया जाता है और संक्रमित मनुष्यों या जानवरों के शारीरिक द्रवों अथवा दूषित सतहों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है।
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