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राम मंदिर निर्माण किसी सरकार या दल की उपलब्धि नहीं, न्यायिक प्रक्रिया का नतीजा: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

jantaserishta.com
18 July 2026 11:05 AM IST
राम मंदिर निर्माण किसी सरकार या दल की उपलब्धि नहीं, न्यायिक प्रक्रिया का नतीजा: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
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अयोध्या: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या दौरे के दौरान राम जन्मभूमि, सनातन धर्म, गौ संरक्षण और अपनी 'गविष्टि यात्रा' को लेकर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल एक प्राचीन नगर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आधारभूमि है, जहां भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर धर्म को व्यावहारिक स्वरूप दिया।
पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या ने न केवल दुनिया को दिशा दिखाई, बल्कि सनातन धर्म को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम के रूप में धर्म ने जब अवतार लिया तो अयोध्या को अपनी जन्मभूमि के रूप में चुना। उनके अनुसार, यह वही स्थान है जहां धर्म का साकार स्वरूप प्रकट हुआ और यहीं से उसका विस्तार चारों दिशाओं में हुआ। उन्होंने कहा कि इसी कारण सात मोक्षदायिनी पुरियों में अयोध्या को प्रथम स्थान प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि कलियुग के प्रभाव के कारण राम जन्मभूमि एक समय लुप्त हो गई थी।
राम मंदिर निर्माण के संबंध में उन्होंने कहा कि यह किसी सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि विवाद में कानूनी लड़ाई 'राम लल्ला विराजमान' की ओर से लड़ी गई थी और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भी उनके पक्ष में आया। इसलिए मंदिर के मुख्य गर्भगृह और मुख्य आसन पर विराजमान होने का अधिकार भी 'राम लल्ला विराजमान' का ही है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "अपनी 'गविष्टि यात्रा' के जरिए हमने लगभग 375 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं से संवाद किया है। आज हम इस यात्रा के बारे में चर्चा करने के लिए इस पवित्र भूमि पर आए हैं। 'गविष्टि' का अर्थ गौ माता के जीवन और सम्मान की रक्षा करना है। गौ माता इस दुनिया में केवल मांस या दूध के लिए नहीं आई हैं। उन्हें केवल इन्हीं नजरियों से देखना उचित नहीं है। उनका उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक और विशिष्ट है। जहां तक अयोध्या का प्रश्न है, इसकी महानता भगवान श्रीराम की जन्मभूमि होने के कारण है। अगर गौ माता न होतीं, तो आज राम जन्मभूमि हमारे पास न होती।"
उन्होंने गौ संरक्षण, सनातन धर्म के मूल्यों और धार्मिक आस्था को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों से इन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्म, न्याय और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा इन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना आवश्यक है।
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