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गंगा किनारे अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार को छह हफ्ते का अल्टीमेटम

Saba Naaz
23 July 2026 9:56 PM IST
गंगा किनारे अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार को छह हफ्ते का अल्टीमेटम
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नई दिल्ली। गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने बिहार सरकार को पटना में गंगा तट के नौजर घाट और नूरपुर घाट के बीच मौजूद सभी अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को छह सप्ताह के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील गंगा तटों पर अवैध गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बिहार सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह गंगा किनारे बने सभी अवैध ढांचों को हटाने की कार्रवाई जल्द पूरी करे। अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक सक्षम अधिकारी को कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों के बावजूद अगर अवैध निर्माण जारी हैं तो यह चिंता का विषय है। अदालत ने संकेत दिया कि गंगा जैसी महत्वपूर्ण नदी के किनारे पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ने वाली गतिविधियों को रोकना जरूरी है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की उस मांग पर भी विचार किया, जिसमें राज्यों से संबंधित विस्तृत जानकारी जमा करने के लिए समय मांगा गया था। केंद्र की ओर से बताया गया कि कई राज्यों ने अभी तक जरूरी डेटा उपलब्ध नहीं कराया है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को अंतिम मौका दिया है। अदालत ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्यों ने समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई तो संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए बुलाया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

यह मामला पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 30 जून 2020 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। एनजीटी ने नदी के संवेदनशील तटों पर हुए निर्माण और अतिक्रमण की पर्याप्त जांच किए बिना याचिका खारिज कर दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने अदालत में कहा कि प्रशासन की चुप्पी और कथित सहमति के कारण गंगा नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि नदी के किनारे लगातार हो रहे पक्के निर्माण से गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है।

गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है, जो करोड़ों लोगों की आस्था और आजीविका से जुड़ी हुई है। इसके किनारों पर अनियंत्रित निर्माण से बाढ़ प्रबंधन, जल गुणवत्ता और जैव विविधता पर असर पड़ने की आशंका रहती है। पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से नदी तटों को अतिक्रमण मुक्त रखने की मांग करते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बिहार सरकार के सामने अब छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने की चुनौती है। प्रशासन को नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच सभी अवैध निर्माणों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। साथ ही कोर्ट को यह भी बताना होगा कि आदेश का कितना पालन किया गया है।

इस फैसले को गंगा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि नदियों और पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी गंगा और दूसरी नदियों के किनारे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

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