न्यूज

दिल्ली में ईसीआई की फुल बेंच से मिलेगा टीएमसी का बागी गुट, पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए पेश करेगा दावा

jantaserishta.com
2 July 2026 8:06 AM IST
दिल्ली में ईसीआई की फुल बेंच से मिलेगा टीएमसी का बागी गुट, पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए पेश करेगा दावा
x
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर जारी सियासी घमासान अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है। पार्टी के बागी गुट ने अब आधिकारिक तौर पर पार्टी के चुनाव चिह्न और फंड पर अपना दावा पेश करने की तैयारी कर ली है।
इसी सिलसिले में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी विधायक दल के 10 बागी विधायक गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय में आयोग की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) से मुलाकात करेंगे।
बागी गुट ने पहले ही इस मामले में चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था। ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि आयोग ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए गुरुवार को सुनवाई के लिए समय तय किया है। इसी बैठक में बागी गुट अपने पक्ष में कानूनी और राजनीतिक दलीलें रखेगा। इसके लिए सभी विधायक बुधवार की शाम को ही कोलकाता से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों ने 22 जून को पार्टी की नई नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन किया था। इस समिति में कुल 30 सदस्य शामिल किए गए हैं, जबकि 10 सदस्यों की एक अलग उप-समिति भी बनाई गई।
सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि नई समिति में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। उनकी जगह वरिष्ठ टीएमसी विधायक अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया। इसके बाद से पार्टी के भीतर विवाद और तेज हो गया।
बागी गुट की ओर से वकीलों की एक टीम पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष सभी प्रस्ताव, कानूनी दस्तावेज और जरूरी कागजात जमा करा चुकी है। अब गुरुवार की बैठक में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायक हैं। बागी गुट का दावा है कि इनमें से 60 विधायक उनके साथ हैं, जबकि 20 विधायक अब भी ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ खड़े हैं।
पूरे विवाद का सबसे अहम मुद्दा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार का है। 1968 के चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश के अनुसार, किसी क्षेत्रीय दल को अपना चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए राज्य में पड़े कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत वोट और कम से कम दो विधायक होना जरूरी है।
बागी गुट का दावा है कि उनके साथ 60 से अधिक विधायक हैं। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक विधायक को मिले औसत वोट को केवल 80 हजार भी माना जाए तो उनके पक्ष में कुल वोट करीब 48 लाख बैठते हैं, जो चुनाव आयोग की तय 6 प्रतिशत की सीमा से काफी अधिक है।
वहीं, बागी गुट का यह भी दावा है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल लेकिन अल्पमत गुट के पास सिर्फ 20 विधायक हैं। ऐसे में उनके पक्ष में वोटों की संख्या 37.80 लाख के आंकड़े तक नहीं पहुंचती। इसी आधार पर बागी गुट का कहना है कि संख्या और वोट, दोनों के लिहाज से पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उसका दावा ज्यादा मजबूत है।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story