न्यूज

अंडमान-निकोबार में पहले एलएनजी आधारित बिजली संयंत्र को अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया तेज

jantaserishta.com
19 July 2026 12:03 PM IST
अंडमान-निकोबार में पहले एलएनजी आधारित बिजली संयंत्र को अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया तेज
x
कोलकाता: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थापित किए जाने वाले पहले एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) आधारित बिजली संयंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अंडमान-निकोबार प्रदूषण नियंत्रण समिति ने परियोजना स्थल तक एलएनजी के परिवहन से संबंधित पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) रिपोर्ट पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
इस परियोजना के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने होप टाउन, श्री विजयापुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएन) द्वारा स्थापित किए जा रहे 55 मेगावाट के एलएनजी आधारित बिजली संयंत्र को री-गैसीफाइड एलएनजी की आपूर्ति करेगा। एनवीवीएन, एनटीपीसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
इस बिजली संयंत्र को सितंबर 2022 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) से पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) मिल चुकी है। वर्तमान में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह अपनी बिजली की अधिकांश जरूरतों के लिए डीजल आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भर है। द्वीपों में विश्वसनीय, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने होप टाउन में एलएनजी आधारित बिजली परियोजना विकसित करने की पहल की थी।
यह परियोजना केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत द्वीप क्षेत्रों में डीजल आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम कर स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
शुरुआत में इस संयंत्र को ड्यूल फ्यूल (डीजल और एलएनजी) पर संचालित करने की योजना थी और इसकी जिम्मेदारी एनवीवीएन को सौंपी गई थी। इसके बाद में केंद्र सरकार की द्वीपों में बिजली उत्पादन के डीजलीकरण को समाप्त करने की नीति के अनुरूप परियोजना में बदलाव करते हुए इसे केवल एलएनजी आधारित संयंत्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद बिजली मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय की सहमति से आईओसीएल को एलएनजी आपूर्ति से जुड़ा आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। योजना के अनुसार, छोटे एलएनजी टैंकर समुद्री मार्ग से गैस लेकर द्वीप पहुंचेंगे, और वहां फ्लोटिंग स्टोरेज एंड री-गैसीफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) में एलएनजी उतारी जाएगी। इसके बाद गैस को पाइपलाइन के माध्यम से बिजली संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा।
यह परियोजना पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के तहत श्रेणी ‘ए’ की परियोजना है और इसमें तेल एवं गैस पाइपलाइन तथा एलएनजी अवसंरचना शामिल है, इसलिए इसका मूल्यांकन केंद्रीय स्तर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) द्वारा किया जाएगा।
आईओसीएल ने परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन और पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार करने हेतु आवश्यक टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) प्राप्त करने के लिए 'परिवेश' पोर्टल के माध्यम से मंत्रालय में आवेदन किया था। मंत्रालय ने परियोजना के लिए टीओआर जारी कर दिया, जिसके बाद मार्च से मई 2023 के बीच आधारभूत पर्यावरणीय अध्ययन किए गए।
आईओसीएल ने चेन्नई स्थित इंडोमर कोस्टल हाइड्रोलिक्स प्राइवेट लिमिटेड को पूर्व में उपलब्ध आधारभूत आंकड़ों और हाल में एकत्रित अतिरिक्त आंकड़ों के आधार पर संशोधित ईआईए और ईएमपी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी।
इसके अलावा, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई के आईआरएस द्वारा तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) की मैपिंग और रिपोर्ट का भी संशोधन किया गया। अंतिम रिपोर्ट में पूर्व के आधारभूत आंकड़ों और नए पूरक आंकड़ों के आधार पर संशोधित ईआईए और ईएमपी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
अंडमान-निकोबार प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना से द्वीपों में डीजल जनरेटर सेटों पर निर्भरता काफी कम होगी। एलएनजी का उपयोग डीजल की तुलना में अधिक किफायती होने के साथ-साथ 60 से 90 प्रतिशत तक धुंध पैदा करने वाले प्रदूषकों तथा 30 से 40 प्रतिशत तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद करेगा।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story