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पीएम मोदी ने भारत के विकास में निभाई बदलावकारी भूमिका, इजरायल में भी हैं बेहद लोकप्रिय: रूवेन अजार

jantaserishta.com
18 Aug 2026 6:03 PM IST
पीएम मोदी ने भारत के विकास में निभाई बदलावकारी भूमिका, इजरायल में भी हैं बेहद लोकप्रिय: रूवेन अजार
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नई दिल्ली: भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और भारत के विकास में उनके बदलाव लाने वाली भूमिका की भी सराहना की। यरुशलम में इजरायली संसद नेसेट के विशेष पूर्ण सत्र में इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को याद करते हुए इजरायली राजनयिक ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि इजरायल के लोग प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हैं। दुनिया के कई अन्य देशों की तरह इजरायल में भी प्रधानमंत्री मोदी को बेहद सम्मान और लोकप्रियता हासिल है।
रूवेन अजार ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के विकास में एक बदलावकारी भूमिका निभाई है। जब आप यहां रहते हैं, जब आप भारत के विकास के आंकड़े देखते हैं, जब आप यहां युवा पीढ़ी के सशक्तीकरण, अर्थव्यवस्था की विकास दर, बुनियादी ढांचे के निर्माण, सुधारों को देखते हैं तो यह स्पष्ट दिखता है और यह तथ्य है कि अब भारत दुनिया के लिए खुल रहा है।"
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम सोमवार को खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान वाशिंगटन के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उस तरह के समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है जिसे वह जरूरी मानते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण है, जबकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि ईरान और ओमान स्ट्रेट में समुद्री यातायात के नए मार्ग के नक्शे पर सहमत हो गए हैं।
अजार ने कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और वह होर्मुज स्ट्रेट में अपनी हरकतों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका से जबरन वसूली करने की कोशिश कर रहा है।
इजरायली राजदूत ने कहा, "मुझे लगता है कि यह ईरान की तरफ से बहुत ही नासमझी भरा कदम है और इसकी दो वजहें हैं। पहली वजह यह है कि पहले से ही कई देश होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करने वाले पाइपलाइन बनाने में लगे हुए हैं। हमने इराक से तुर्किए और सीरिया होते हुए भूमध्य सागर तक 60 अरब डॉलर की पाइपलाइन बनाने की खबर देखी। हम निश्चित रूप से सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के बारे में जानते हैं। खाड़ी में एक और पाइपलाइन की योजना है जो इराक से सीधे संयुक्त अरब अमीरात तक जाएगी। संयुक्त अरब अमीरात में भी एक पाइपलाइन को अपग्रेड किया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि ईरान का ये कदम बहुत ही नासमझी वाला है। आखिरकार इससे कोई विकल्प नहीं निकलेगा और न ही यह ईरान को अपनी उस बड़ी हार को छिपाने में जीत दिलाएगा जो उसे सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर मिली।"
तेल अवीव के कई सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्किए के साथ हाल ही में हुए पारस्परिक रक्षा समझौते को इजरायल और भारत के खिलाफ एक व्यापक एकजुट मुस्लिम मोर्चे में बदलने की कोशिश की है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब पर ईरान के संभावित हमले को रोकना था। तुर्किए के विदेश मंत्री ने इस सामूहिक रक्षा समझौते की तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से भी की। अजार का मानना है कि 7 अगस्त को मक्का में हुए संयुक्त रक्षा समझौते के निहितार्थों का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।
इजरायली राजदूत अजार ने कहा, "अभी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। सऊदी अरब पहले से ही तुर्किए का दुश्मन रहा है और हमें अच्छी तरह याद है कुछ साल पहले जमाल (खशोगी) का मामला और कैसे तुर्क मुस्लिम ब्रदरहुड को सऊदी अरब में घुसाने की कोशिश कर रहे थे। मौजूदा हालात का ज्यादा लेना-देना ईरान से बढ़ते खतरे और इस बात से है कि ईरान ने सऊदी अरब पर एकतरफा हमला करने का फैसला किया। हमने पिछले कुछ दशकों में इस इलाके में अलग-अलग संगठन देखे हैं। हमने इसे नाटो के बराबर के स्तर तक बढ़ते नहीं देखा, लेकिन हमें इंतजार करना और देखना होगा।"
विशेषज्ञों का यह भी मानना ​​है कि ईरान युद्ध ने एक दृष्टिभ्रम पैदा कर दिया है, जिसमें इस्लामाबाद सीजफायर कराने का दावा कर रहा है, जबकि सालों के अकेलेपन से खराब हुई अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को फिर से बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।
अजार ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान इस मामले में मिलिट्री के तौर पर शामिल रहा है। अमेरिका ने एक डिप्लोमैटिक भूमिका तय किया है, जो कि बहुत सफल नहीं रही है। हम देख सकते हैं कि कुछ महीने पहले हस्ताक्षर किए गए एमओयू को ईरान ने तोड़ा है, और आईआरजीसी (ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने हस्ताक्षर किए गए समझौते के उलट स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करने का फैसला किया है। इसलिए यह देखना बाकी है कि वह देश किसी के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है।"
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