न्यूज

गरीबी और चुनौतियों को मात देकर पहली आदिवासी युवती विनीता सोरेन ने फतह किया था माउंट एवरेस्ट

jantaserishta.com
20 Jun 2026 10:16 AM IST
गरीबी और चुनौतियों को मात देकर पहली आदिवासी युवती विनीता सोरेन ने फतह किया था माउंट एवरेस्ट
x
नई दिल्ली: झारखंड की धरती से निकलकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने वाली विनीता सोरेन साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल हैं। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को पंख दिए और एवरेस्ट फतह करने वाली पहली आदिवासी महिला बनकर इतिहास रच दिया। 25 साल की उम्र में विनीता ने जिस ऊंचाई को छुआ, उसके पीछे उनकी मेहनत और अदम्य साहस की कहानी है। दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर को छूकर, उन्होंने यह साबित कर दिया कि सपनों की ऊंचाई किसी सामाजिक सीमा में नहीं बंधा जा सकता है।
झारखंड के सेराइकेला खरसावां जिले के राजनगर ब्लॉक के केसोरसोरा गांव में 21 जून 1987 को विनीता का जन्म एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखने का साहस किया। विनीता का जीवन आम आदिवासी लड़कियों की तरह ही शुरू हुआ। वे खेतों में काम करने, सीमित शिक्षा और सीमित सपनों तक ही निर्धारित थीं लेकिन विनीता के सपने एवरेस्ट से भी ऊंचे थे।
विनीता के गांव और आसपास के इलाकों में लड़कियों के लिए टीचिंग या नर्सिंग ही करियर माने जाते थे लेकिन उनका सपना बिल्कुल अलग था। एवरेस्ट फतह करने से पहले उन्हें सात साल की कठोर मेहनत करनी पड़ी। इस दौरान उन्होंने सीखा कि पर्वतारोहण केवल ताकत नहीं बल्कि मेंटल स्ट्रेंथ, साहस और संकल्प की भी परीक्षा है। भीषण ठंड और बर्फबारी के बीच कई बार कठिन पल आए। कई बार ऐसा लगा कि इस सफर की मंजिल ही नहीं है लेकिन हिम्मत, लगन और दुनिया जीत लेने के जुनून ने उनको बर्फीले पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचा दिया।
विनीता 2004 में विनीता पहली बार बछेंद्री पाल से मिली थीं और उनकी प्रेरणा से ही पर्वतारोही बनने का लक्ष्य तय किया। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला बछेंद्री पाल ने ही विनीता सोरेन को प्रशिक्षण दिया। आदिवासी और किसान परिवार से होने की वजह से पर्वतारोही बनने की उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी। घर से बाहर निकलना ही उनके लिए एवरेस्ट चढ़ने जैसा था, लेकिन परिवार ने भरोसा किया और आगे बढ़ने की हिम्मत दी।
विनीता सोरेन ने 'इको एवरेस्ट स्प्रिंग अभियान' के तहत 20 मार्च 2012 को अपने दो साथियों के साथ जमशेदपुर से अपनी यात्रा शुरू की। 26 मई 2012 को सुबह 6:50 बजे विनीता और मेघलाल महतो ने राजेंद्र सिंह पाल के साथ माउंट एवरेस्ट के शिखर पर भारतीय ध्वज फहराकर इतिहास रच दिया।
एवरेस्ट विजय के अलावा विनीता ने कई साहसिक अभियानों में हिस्सा लिया। वह भारत की महिला थार मरुस्थल अभियान टीम का भी हिस्सा रहीं, जिसने गुजरात के भुज से पंजाब के वाघा बॉर्डर तक लगभग 2,000 किलोमीटर की यात्रा 30 दिनों में पूरी की। विनीता सोरेन की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देश की आदिवासी महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। उन्होंने साबित किया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के सामने बाधा नहीं बन सकती।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story