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महाराष्ट्र: स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और तेजी पर दिया जाए विशेष ध्यान, बैठक में बोले सीएम फडणवीस

jantaserishta.com
19 May 2026 8:43 AM IST
महाराष्ट्र: स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और तेजी पर दिया जाए विशेष ध्यान, बैठक में बोले सीएम फडणवीस
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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार पूरे महाराष्ट्र में लोगों को बेहतर और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय से काम करने और प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और लैब निर्माण कार्य तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और लोगों के अनुकूल बन सके।
सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री वॉर रूम बनाया गया है। इसी व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान से जुड़े लंबित कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु समेत कई राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद महाराष्ट्र के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है और अब इसे प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि का समय पर उपयोग होना जरूरी है। इसलिए सभी जिलाधिकारियों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के निर्माण कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी करनी चाहिए। शुरुआत में देरी हुई थी, लेकिन अब जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक है।''
उन्होंने कहा कि कुछ जिलों में अभी भी काम धीमा है, इसलिए सभी जिलों को तय समय में परियोजनाएं पूरी करने पर ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ''लंबित परियोजनाओं में विभागों के बीच समन्वय की कमी नहीं होनी चाहिए। सकारात्मक प्रशासनिक सोच के साथ काम पूरा किया जाए।'' उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को कम प्राथमिकता वाला मानने की सोच बदलने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्ता, साफ-सफाई और बेहतर ब्रांडिंग दिखनी चाहिए। अधिकारियों को यह धारणा बदलनी होगी कि सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता और सेवाओं का स्तर खराब होता है।
उन्होंने अधिकारियों को नई तकनीक अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया और कहा कि मॉड्यूलर तकनीक से बेहतर गुणवत्ता और तय समय में निर्माण संभव है। पुणे के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयोग राज्य के अन्य हिस्सों में भी किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''हर अधिकारी को अपने काम की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, ताकि लोगों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में साफ तौर पर सुधार महसूस हो।'' उन्होंने मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए और कहा कि बैठक में तय समयसीमा को आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा, ''अगली वॉर रूम बैठक में प्रगति की समीक्षा की जाएगी और अधिकारियों से आज किए गए वादों को पूरा करने की उम्मीद होगी। मामलों को लंबित न रखें और फॉलोअप बढ़ाएं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी स्तर पर समस्या हल नहीं हो रही है तो उसे तुरंत विभागाध्यक्ष, सचिव, मुख्य सचिव, मंत्री या मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाए। देरी नहीं होनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि राज्य का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत हो सके। उन्होंने कहा, ''स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना की लगातार समीक्षा की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं से स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन भी बढ़ेगा।''
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