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जैव-अर्थव्यवस्था क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत: डीसीपीसी सचिव
jantaserishta.com
3 Jun 2026 11:09 AM IST

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नई दिल्ली: सरकार के अनुसार, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने वाली नीतियों और जैव-अर्थव्यवस्था (बायो-इकोनॉमी) से जुड़ी लक्षित पहलों के कारण भारत जैव-अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि इनपुट क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (डीसीपीसी) के सचिव तेजवीर सिंह ने कहा कि भारत के पास जैव-अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि इनपुट क्षेत्र में वैश्विक नेता बनने की अपार संभावनाएं हैं। इसकी वजह देश का मजबूत वैज्ञानिक आधार, समृद्ध जैव विविधता और तेजी से विकसित हो रहा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
उन्होंने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला 'बायोपीएसएफ 2026' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही।
डीसीपीसी सचिव ने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रभावी साझेदारी तथा युवा नवाचारकर्ताओं का तकनीकी योगदान भविष्य की टिकाऊ कृषि समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि जैव-कीटनाशकों की वास्तविक सफलता मजबूत फॉर्मूलेशन तकनीकों के विकास पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें उत्पाद की स्थिरता, खेतों में उसकी प्रभावशीलता, उपयोग में आसानी और किसानों द्वारा उसे अपनाने की संभावना को बढ़ा सकती हैं।
'बायोपीएसएफ 2026' कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मूलेशन टेक्नोलॉजी (आईपीएफटी), गुरुग्राम द्वारा किया गया। यह संस्था रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग की एक स्वायत्त संस्था है।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत 2047' और मजबूत जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने, अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने और स्टार्टअप-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि जैव-आधारित रसायनों, फसल सुरक्षा तकनीकों और टिकाऊ कृषि इनपुट के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना समय की मांग है।
मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम आईपीएफटी के 36वें स्थापना दिवस समारोह के तहत आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नियामक संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सभी ने जैव-आधारित कृषि इनपुट से जुड़े नवीनतम विकास और टिकाऊ कृषि में उनकी भूमिका पर चर्चा की।
Tagsडीसीपीसी सचिव
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