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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से देश में निवेश बढ़ेगा, अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स को होगा फायदा
jantaserishta.com
27 April 2026 12:42 PM IST

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नई दिल्ली: भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर सोमवार को साइन होंगे। न्यूजीलैंड की सरकार इसे एक पीढ़ी में एक बार आने वाला मौका बता रही है। वहीं, भारत को भी इस समझौते से काफी फायदा होगा। इससे देश में निवेश बढ़ेगा, साथ ही अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स के लिए ज्यादा मौके पैदा होंगे।
एफटीए के तहत न्यूजीलैंड ने अपनी 95 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात के लिए शुल्क में कमी की है। इससे न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों के लिए बड़े स्तर पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस का रास्ता खुला है।
इस एफटीए के लागू होने के बाद भारत से अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल, प्लास्टिक, लेदर और इंजीनियरिंग के उत्पाद जीरो ड्यूटी पर न्यूजीलैंड में प्रवेश कर पाएंगे, जिन पर फिलहाल औसत 2.3 प्रतिशत टैरिफ है।
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने का ऐलान किया है। एफटीए से भारतीय पेशेवरों के लिए भी उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर खुलेंगे। समझौते के तहत कौशल युक्त भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड अस्थायी रोजगार वीजा देगा, जिसके तहत पेशेवर न्यूजीलैंड में तीन साल तक रहकर कार्य कर सकेंगे। हालांकि, यह कोटा 5,000 वीजा का निर्धारित किया गया है।
इससे आईटी, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज, पर्यटन, कंस्ट्रक्शन और अन्य बिजनेस सर्विसेज से जुड़े पेशेवरों को फायदा होगा। इस एफटीए में आपसी हितों का ध्यान रखा गया है। इस वजह से इससे न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भी फायदा होगा।
भारत ने न्यूजीलैंड को अपनी करीब 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर छूट प्रदान की है, जिसमें से 54.11 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर छूट इस समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही शुरू हो जाएगी। इसमें भेड़ों का मांस, ऊन, कोयला और वानिकी से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।
भारत ने न्यूजीलैंड के सेब, किवीफ्रूट, शहद और अन्य उत्पादों को टैरिफ छूट में रखा है। हालांकि, इसके लिए कोटा और न्यूनतम आयात कीमत (एमआईपी) को निर्धारित किया गया है। साथ ही, इस समझौते के तहत कई समुद्री उत्पादों जैसे मसल्स और सैल्मन पर लगने वाला शुल्क सात साल की अवधि में समाप्त कर दिया जाएगा।
भारत सरकार ने किसानों और एमएसएमई के हितों का ध्यान रखते हुए डेयरी, पशु उत्पाद, सब्जियों और चीनी जैसे उत्पादों को इस एफटीए से बहार रखा है।
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