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सरकार ने सीएनजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के सत्यापन का दायरा बढ़ाया, नई शुल्क लागू
jantaserishta.com
24 May 2026 12:48 PM IST

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नई दिल्ली: कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और स्वच्छ ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल को बढ़ावा देने के मकसद से केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि उसने 'लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013' में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य भारत के लीगल मेट्रोलॉजी इकोसिस्टम को और मजबूत करना तथा देश में वजन और माप के सत्यापन संबंधी बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है।
इस संशोधन की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के दायरे का विस्तार किया गया है, ताकि अतिरिक्त ईंधन वितरण प्रणालियों के सत्यापन और पुनः सत्यापन को भी इसमें शामिल किया जा सके। उम्मीद है कि इस कदम से सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी।
इन संशोधनों के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने-अपने नियमों के अनुसार जीएटीसी के माध्यम से सत्यापन के लिए वजन और माप की अतिरिक्त श्रेणियों को अधिसूचित कर सकें।
पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के सत्यापन के लिए शुल्क 5 हजार रुपए प्रति नोजल निर्धारित किया गया है, जबकि सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए यह शुल्क 10 हजार रुपए प्रति नोजल तय किया गया है।
संशोधित नियमों के तहत उन उपकरणों की सूची में डिस्पेंसिंग सिस्टम की पांच श्रेणियां जोड़ी गई हैं, जिनका सत्यापन जीएटीसी द्वारा किया जा सकेगा। इनमें पेट्रोल/डीजल डिस्पेंसर, सीएनजी डिस्पेंसर, एलपीजी डिस्पेंसर, एलएनजी डिस्पेंसर और हाइड्रोजन डिस्पेंसर शामिल हैं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक बयान में कहा कि इन उपकरणों को शामिल किए जाने के बाद जीएटीसी अब 'लीगल मेट्रोलॉजी' (वैधानिक माप-तौल) ढांचे के तहत वजन और माप की कुल 23 श्रेणियों का सत्यापन और पुनः सत्यापन कर सकेंगे।
जीएटीसी ऐसी अनुमोदित सुविधाएं हैं, जिनके पास 'लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट' और उससे संबंधित नियमों के तहत निर्धारित वजन और माप के सत्यापन तथा पुनः सत्यापन का कार्य करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है।
योग्य निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को शामिल करके जीएटीसी ढांचा देश की सत्यापन क्षमता का विस्तार करने तथा सत्यापन सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद करता है।
Tagsसीएनजी
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