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संजय टाइगर रिजर्व में दो नर बाघों का संघर्ष थमा, बाघिन टी-40 शावकों संग पर्यटन क्षेत्र में लौटी

jantaserishta.com
29 Jun 2026 12:43 PM IST
संजय टाइगर रिजर्व में दो नर बाघों का संघर्ष थमा, बाघिन टी-40 शावकों संग पर्यटन क्षेत्र में लौटी
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सीधी: देश में बाघों की सबसे अधिक संख्या को लेकर अपनी अलग पहचान रखने वाले मध्य प्रदेश से वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व में लंबे समय से दो नर बाघों के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब थमती दिखाई दे रही है। इस संघर्ष के कारण अपने चार शावकों के साथ बफर क्षेत्र में रहने को मजबूर हुई बाघिन टी-40 अब तीन शावकों के साथ फिर पर्यटन क्षेत्र में लौट आई है। लगातार हो रही टाइगर साइटिंग ने पर्यटकों का उत्साह बढ़ा दिया है। वहीं, वन विभाग इसे जंगल में सामान्य होती परिस्थितियों का संकेत मान रहा है।
सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व में कई महीनों से दो नर बाघों के बीच चल रही वर्चस्व की जंग अब शांत होती नजर आ रही है। इसका असर यह हुआ है कि लंबे समय से पर्यटक क्षेत्र से दूर रहने वाली बाघिन T-40 अब अपने तीन शावकों के साथ फिर पर्यटन क्षेत्र में दिखाई देने लगी है। लगातार हो रही टाइगर साइटिंग से न सिर्फ पर्यटक रोमांचित हैं बल्कि वन विभाग भी इसे जंगल में सामान्य होते प्राकृतिक संतुलन का संकेत मान रहा है।
संजय टाइगर रिजर्व की पहचान विंध्य अंचल के महत्वपूर्ण टाइगर लैंडस्केप के रूप में होती है। पिछले कई महीनों से यहां नर बाघ टी-56 और टी-67 के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष जारी था। जंगल में प्रभुत्व स्थापित करने की इस स्वाभाविक लड़ाई का सबसे ज्यादा असर बाघिन टी-40 और उसके शावकों पर पड़ा। टी-40 कोई सामान्य बाघिन नहीं है बल्कि बचपन में मां को खो देने के बाद उसका पालन-पोषण रिजर्व की चर्चित बाघिन "मौसी" की निगरानी में हुआ था।
वन विभाग की सतत निगरानी और जंगल की अनुकूल परिस्थितियों में पली-बढ़ी टी-40 ने वयस्क होने के बाद अपना क्षेत्र बनाया और चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इसे बड़ी उपलब्धि माना गया था लेकिन इसी दौरान दो नर बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष ने हालात बदल दिए। अपने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए टी-40 को पर्यटन क्षेत्र छोड़कर बफर जोन के घने जंगलों में शरण लेनी पड़ी। लंबे समय तक उसकी गतिविधियां कैमरा ट्रैप और वन विभाग की निगरानी तक ही सीमित रहीं, जबकि पर्यटकों को उसके दर्शन नहीं हो सके। कुछ समय पहले जब टी-40 अपने चारों शावकों के साथ वापस पर्यटन क्षेत्र में लौटी, तब एक दुखद घटना ने वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर दिया। नर बाघ टी-67 ने उसके एक शावक का शिकार कर लिया। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय प्रभुत्व और प्रजनन व्यवहार के कारण कई बार नर बाघ शावकों पर हमला कर देते हैं। यह प्रकृति का कठोर लेकिन स्वाभाविक व्यवहार माना जाता है। इस घटना के बाद टी-40 फिर अपने शेष तीन शावकों को लेकर सुरक्षित इलाकों में चली गई थी,अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार, दोनों नर बाघों के बीच टकराव पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। यही वजह है कि टी-40 अपने तीनों शावकों के साथ फिर से पर्यटन क्षेत्र में निर्भय होकर दिखाई दे रही है। वहीं टी-56 और टी-67 की गतिविधियां भी अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज की जा रही हैं, जिससे जंगल में संतुलन लौटने के संकेत मिल रहे हैं। इन दिनों संजय टाइगर रिजर्व पहुंचने वाले पर्यटकों को एक साथ बाघ, बाघिन और शावकों के दीदार हो रहे हैं।
कई सफारी वाहनों ने लगातार टी-40 और उसके तीन शावकों की मौजूदगी दर्ज की है। पर्यटकों द्वारा बनाए गए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे संजय टाइगर रिजर्व एक बार फिर देशभर के वन्यजीव प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
वन विभाग का कहना है कि रिजर्व में प्रत्येक बाघ की गतिविधियों पर कैमरा ट्रैप, जीपीएस आधारित मॉनिटरिंग और नियमित गश्त के माध्यम से नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जंगल में प्राकृतिक संतुलन कायम रहना बाघ संरक्षण की सबसे बड़ी सफलता है। यदि बाघिन अपने शावकों के साथ सामान्य जीवन जी रही है, तो यह स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी टाइगर रिजर्व में नर बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष असामान्य नहीं होता, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद जब बाघिन अपने शावकों के साथ फिर खुले तौर पर दिखाई देने लगे, तो इसे जंगल में स्थिरता लौटने का संकेत माना जाता है। यही स्थिति इस समय संजय टाइगर रिजर्व में देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश पहले ही देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य है, ऐसे में संजय टाइगर रिजर्व से सामने आई यह तस्वीर न केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता को दर्शाती है, बल्कि टाइगर टूरिज्म को भी नई ऊर्जा देने वाली है। बाघिन टी-40 और उसके तीन शावकों की सुरक्षित मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि संरक्षण के प्रयास और प्राकृतिक संतुलन दोनों सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संजय टाइगर रिजर्व सीधी के एसडीओ सुधीर मिश्र ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "टी-56 और टी-67 नर बाघों के लेकर हुए संघर्ष में टी-40 बाघिन प्रभावित हुई थी। इसके बाद अपने 4 शावकों को लेकर बफर क्षेत्र में चली गई थी। बीच में टी-40 बाघिन ने अपने क्षेत्र में लौटने की कोशिश की तो टी-67 बाघ ने एक शावक को मार दिया था। इसके बाद से ही टी-40 बाघिन पर्यटन क्षेत्र में है। अब पर्यटन क्षेत्र में टी-56, टी-67 और टी-40 बाघिन भी दिख रही है।"
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