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क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन का बढ़ता दबदबा सुरक्षा के लिए खतरा: अमेरिकी विदेश मंत्री

jantaserishta.com
3 Jun 2026 11:12 AM IST
क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन का बढ़ता दबदबा सुरक्षा के लिए खतरा: अमेरिकी विदेश मंत्री
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वॉशिंगटन: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी कि दुनिया भर में जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है, जो आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका उन्नत तकनीकों, रक्षा प्रणालियों और औद्योगिक उत्पादन के लिए ज़रूरी संसाधनों के मामले में बीजिंग पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए दुनिया भर में अपनी साझेदारियां बढ़ा रहा है।
अमेरिकी संसद की हाउस एप्रोप्रिएशंस सबकमेटी के सामने बोलते हुए रुबियो ने कहा कि एक ही देश में इतने महत्वपूर्ण खनिजों और उनकी प्रोसेसिंग क्षमता का केंद्रित होना अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के सहयोगी देशों के लिए भी बड़ी रणनीतिक कमजोरी है।
उन्होंने कहा क‍ि यह दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है और सच कहूं तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक है कि किसी भी जरूरी चीज के लिए 90 प्रतिशत तक एक ही देश पर निर्भर रहना पड़े। चाहे वह आपकी इंडस्ट्रियल बेस हो, डिफेंस सिस्टम हो या टेक्नोलॉजी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन अपनी आर्थिक और विदेश नीति में ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ को बहुत अहम जगह दे रहा है, खासकर चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच।
लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक गाड़ियों, सेमीकंडक्टर्स, बैटरियों, टेलीकॉम उपकरणों, रिन्यूएबल एनर्जी तकनीक और आधुनिक सैन्य सिस्टम के लिए बहुत जरूरी हैं।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर के कई देशों के साथ मिलकर सप्लाई चेन को अलग-अलग जगहों पर फैलाने की कोशिश कर रहा है, ताकि कच्चे माल और उनकी प्रोसेसिंग दोनों के वैकल्पिक स्रोत तैयार किए जा सकें।
उन्होंने बताया, “हमने तीन दर्जन या उससे भी ज्यादा देशों को क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल मीटिंग में शामिल किया।”
उनके मुताबिक, अब क्रिटिकल मिनरल्स अमेरिका की कूटनीति का एक अहम हिस्सा बन गए हैं और लगभग हर अमेरिकी दूतावास में इस पर काम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब अमेरिका की विदेश नीति में बहुत प्राथमिकता वाला बन चुका है, ताकि अलग-अलग देशों के साथ मिलकर चीन पर निर्भरता कम की जा सके।
रुबियो ने यह भी कहा कि अगर किसी एक देश पर जरूरत की चीजों के लिए बहुत ज्यादा निर्भरता हो, तो संकट के समय उसका इस्तेमाल आर्थिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिका की रणनीति सिर्फ खनिज हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन देशों में प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जहां ये संसाधन मिलते हैं।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर बनी हाउस सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष जॉन मोलिनार ने भी सप्लाई चेन को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशों पर जोर दिया।
रुबियो ने कहा कि इसी तरह की चिंताएं दवाइयों और अन्य क्षेत्रों में भी हैं, जहां उत्पादन बहुत ज्यादा चीन में केंद्रित हो चुका है, जिससे वैश्विक बाजार और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
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