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पुरी में रथयात्रा से पहले कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ के स्वागत में दी मनमोहक नृत्य प्रस्तुति
jantaserishta.com
16 July 2026 8:44 AM IST

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पुरी: ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा से पहले श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर हो उठा। भव्य रथयात्रा के शुभारंभ से पहले तीनों रथों के सामने ओडिसी नृत्य कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया।
एक नृत्य कलाकार ने कहा कि उनके लिए यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि वर्ष में एक बार भगवान जगन्नाथ स्वयं मंदिर से निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। ऐसे पावन अवसर पर भगवान के सामने नृत्य करने का अवसर मिलना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सब भगवान की कृपा से ही संभव हो पाता है और उनके सामने प्रस्तुति देना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।
लिंगराज कला निकेतन से जुड़ी एक कलाकार ने बताया कि वे हर वर्ष भगवान की सेवा के लिए पुरी आती हैं। उन्होंने कहा कि रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री बीजे जैसे सभी प्रमुख अवसरों पर वे भगवान जगन्नाथ के समक्ष ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करती हैं। उनके अनुसार ओडिसी नृत्य की परंपरा भगवान जगन्नाथ की भक्ति से जुड़ी हुई है, इसलिए उनके सामने प्रस्तुति देना उनके लिए आध्यात्मिक आनंद का विषय है।
कलाकार ने कहा कि इस बार का अनुभव और भी विशेष है, क्योंकि हल्की बारिश के बीच प्रस्तुति देने का अलग ही आनंद मिला। उन्होंने बारिश की तुलना मोर के नृत्य से करते हुए कहा कि जैसे वर्षा से पहले मोर अपने पंख फैलाकर नृत्य करता है, वैसे ही वे भी भगवान के स्वागत में नृत्य कर रही हैं। अब सभी कलाकार भगवान के रथ पर विराजमान होकर बाहर आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
एक अन्य नृत्यांगना ने बताया कि जब उन्होंने प्रस्तुति शुरू की थी, तब तेज बारिश हो रही थी। इसके बावजूद उन्होंने नृत्य जारी रखा क्योंकि भगवान जगन्नाथ को नृत्य प्रिय है और उन्हीं के लिए ही प्रस्तुति दे रही थीं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक रहेगा।
एक युवा कलाकार ने भावुक होकर कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इस बार वे पुरी आ पाएंगी, लेकिन अपनी मित्र की वजह से उन्हें इस दिव्य अवसर का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा केवल भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की है।
एक अन्य कलाकार ने इस अनुभव को चमत्कार बताते हुए कहा कि उनकी पुरी आने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन भगवान की इच्छा से वे यहां पहुंच गए। उन्होंने बारिश को भगवान इंद्र का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि यह वर्षा भगवान जगन्नाथ के स्वागत से पहले धरती को पवित्र करने के लिए हो रही है।
एक वरिष्ठ कलाकार ने कहा कि जब भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर विराजमान होकर बाहर आते हैं और उनके सिर पर सजा 'तहिया' लय में झूमता है, तब ऐसा लगता है मानो स्वयं महाप्रभु नृत्य कर रहे हों। उन्होंने कहा कि सभी कलाकार उसी दिव्य क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जब भगवान के साथ भक्ति और आनंद का यह उत्सव अपने चरम पर पहुंचेगा।
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