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केरल की राजनीति में तीन साल के बाद बिनेश कोडियेरी की सीपीआई(एम) में वापसी

jantaserishta.com
29 May 2026 3:37 PM IST
केरल की राजनीति में तीन साल के बाद बिनेश कोडियेरी की सीपीआई(एम) में वापसी
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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उलटफेर देखने को मिल रहा है। पूर्व सीपीआई(एम) राज्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन के पुत्र बिनेश कोडियेरी की तीन वर्ष के राजनीतिक निर्वासन के बाद पार्टी की सदस्यता बहाल कर दी गई है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने इसे राजनीतिक न्याय का दुर्लभ क्षण बताया है। यह फैसला, खासकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनकी बेटी वीना विजयन के खिलाफ जांच तेज किए जाने की पृष्ठभूमि में, अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापक चर्चा है कि पिनाराई विजयन ने स्वयं बिनेश की वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया और राज्य नेतृत्व के भीतर मौजूद विरोध को दरकिनार कर दिया। खबरों के अनुसार, पार्टी सचिव एमवी गोविंदन ने 2023 में बेंगलुरु ड्रग मामले में बिनेश के बरी हो जाने के बावजूद उनकी सदस्यता बहाल करने के प्रयासों को बार-बार खारिज किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्णायक मोड़ तिरुवनंतपुरम में ईडी की छापेमारी और उसके बाद हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद आया।
जब केंद्रीय एजेंसियों ने पिनाराई विजयन के आवास पर छापा मारा और वीना विजयन से जुड़े मासिक भुगतान विवाद की जांच तेज की, तो राजधानी की सड़कों पर सीपीआई(एम)-डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं के आक्रामक प्रदर्शन देखने को मिले।
ईडी के वाहनों पर हमले के मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे, उनमें कई बिनेश कोडियेरी के करीबी सहयोगी और समर्थक शामिल बताए जाते हैं। प्रदर्शनों के दौरान बिनेश कोडियेरी स्वयं भी सक्रिय नजर आए। इस घटना ने पिनाराई विजयन के नजरिये को भावनात्मक और राजनीतिक रूप से बदल दिया। कुछ वर्ष पहले, जब ईडी ने बिनेश को गिरफ्तार किया था, तब कोडियेरी बालकृष्णन को पार्टी और सरकार की रक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से अपने बेटे से दूरी बनानी पड़ी थी।
उन्हें पार्टी सचिव पद से अस्थायी रूप से हटना भी पड़ा था। अब, जब केंद्रीय एजेंसियां पिनाराई के अपने परिवार पर सवाल उठा रही हैं, तब कई लोग मानते हैं कि पिनाराई को कोडियेरी की भावनात्मक स्थिति का एहसास हो गया है। बिनेश की वापसी को कोडियेरी परिवार के प्रति पिछले वर्षों में हुई अनदेखी और उपेक्षा के निवारण के रूप में भी देखा जा रहा है।
कोडियेरी बालकृष्णन की मृत्यु के बाद उनके परिवार को अनुचित रूप से किनारे कर दिए जाने की शिकायत पार्टी के एक वर्ग में लंबे समय से रही है। इस कदम से कन्नूर और तिरुवनंतपुरम में कोडियेरी समर्थकों का एक मजबूत गुट पिनाराई विजयन के पीछे एकजुट होने के लिए तैयार हो गया है। वर्तमान संकट के समय यह राजनीतिक एकता पिनाराई के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
वहीं, कई राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे सीपीआई(एम) के भीतर सत्ता समीकरणों में हो रहे बदलाव का संकेत भी मान रहे हैं। बिनेश की सदस्यता बहाली न केवल व्यक्तिगत स्तर पर न्याय की बहाली है, बल्कि पार्टी के अंदर गुटबाजी को कम करने और आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए उठाया गया एक रणनीतिक कदम भी है। यह घटनाक्रम केरल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है, खासकर तब, जब केंद्र की एजेंसियां राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर दबाव बढ़ा रही हैं।
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