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ओवैसी की पार्टी का दीवाली के दिन भी सियासत, मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन का मक़सद कमज़ोरों को ताक़तवर और हिस्सेदार बनाना

jantaserishta.com
5 Nov 2021 7:53 AM IST
ओवैसी की पार्टी का दीवाली के दिन भी सियासत, मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन का मक़सद कमज़ोरों को ताक़तवर और हिस्सेदार बनाना
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नई दिल्ली: हमारा देश इस वक़्त इंतेहाई नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है महंगाई और बेरोज़गारी के अलावा सबसे बड़ा मसअला मुस्लिम अल्पसंख्यकों से नफ़रत में इज़ाफ़ा है । मौजूदा सरकार किसी भी सूरत में मुसलमानों का नाम भी अपनी ज़बान पर लाना नहीं चाहती दूसरी तरफ तथाकथित सेकुलर पार्टियां हैं जिन्हें हमारे वोट की ज़रूरत तो है मगर हमारी नहीं।

इन विचारों को ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन दिल्ली के अध्यक्ष कलीमुल हफ़ीज़ ने दरियागंज में मजलिस के वार्ड कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर हाज़रिन से ख़िताब करते हुए व्यक्त किया। कलीमुल हफ़ीज़ ने कहा कि मुसलमानों-दलितों और कमज़ोरों पर ज़ुल्म में इज़ाफ़ा हो रहा है। सामाजिक तौर पर यह वर्ग नाइंसाफियों का शिकार है। मजलिस का मक़सद मुसलमानों और कमज़ोरों को ताक़तवर बनाना है। मुसलमान अपने साथ भेदभाव की वजह से बेअसर हो गए हैं।मजलिस चाहती है कि मुसलमान अपनी हैसियत को जाने और देश की तामीर व तरक़्क़ी में अपनी हिस्सेदारी अदा करें मगर यह तभी मुमकिन है जब मुसलमान सियासी तौर पर अपनी हिस्सेदारी हासिल करें। मजलिस अध्यक्ष ने कहा कि देश में एक तरफ महंगाई और बेरोज़गारी में बढ़ोतरी हो रही है लेकिन उससे ज़्यादा खतरनाक और देश के लिए तबाहकुन बात यह है कि मुसलमानों से नफ़रत में बढ़ोतरी हो रही है।
खुद हुक्मरान वर्ग मुसलमानों से नफ़रत करता है। तथाकथित सेकुलर पार्टियां भी बहुसंख्यकों के ख़ौफ़ से मुसलमानों का नाम अपनी ज़बान पर लाना नहीं चाहती और चाहते है कि मुसलमानों उन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाएँ लेकिन मुसलमानों की तालीम व तरक़्क़ी का कोई एजेंडा उनके पास नहीं है।
अब वक्त आ गया है कि मुसलमानों को हार जीत की परवाह किए बग़ैर अपने उम्मीदवार को वोट दें ताकि कौमी सतह पर उनकी ताक़त का मुज़ाहिरा हो। मजलिस अध्यक्ष ने कहा कि लोग बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी का एजेंट और मजलिस को बी टीम कहते हैं जबकी कहने वाले खुद ही आर एस एस की नाजायज़ औलाद हैं। दिल्ली की आम आम आदमी पार्टी की तरफ़ इशारा करते हुए कलीमुल हफ़ीज़ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने मुस्लिम इलाकों को पूरी तरह नजरअंदाज़ कर रखा है वहां सफाई सुथराई का बुरा हाल है पुलिस की दादागिरी खुलेआम है और हमारे चुने हुए नुमाइंदें जिनके नाम उर्दू में है ख़ामोश तमाशा देख रहे हैं।कलीमुल हफ़ीज़ कहा कि दिल्ली की सियासत में पिछले 20 साल में कुछ नहीं बदला है चंद लोग तो वह हैं जिनकी सिर्फ पार्टियां बदली हैं कभी वह जनता दल में थे कभी कांग्रेस से और आज आम आदमी पार्टी का झंडा उठाए हुए हैं ऐसे लोगों की कोई अख़लाक़ी क़द्र नहीं होती है अब वक़्त है कि अपनी क़यादत को मज़बूत किया जाए और अपनी हिस्सेदारी हासिल की जाए। प्रोग्राम में शाह आलम जनरल सेक्रेटरी , अब्दुल ग़फ़्फ़ार सिद्दीक़ी संगठन सचिव , ने भी ख़िताब किया ।निज़ामत ज्वाइंट सेक्रेट्री फ़हमीद हसन ने की

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