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नकली-मिलावटी दवाओं पर योगी सरकार का शिकंजा, लाइसेंस से सप्लाई चेन तक कड़ी निगरानी

SHIDDHANT
24 Aug 2026 7:50 PM IST
नकली-मिलावटी दवाओं पर योगी सरकार का शिकंजा, लाइसेंस से सप्लाई चेन तक कड़ी निगरानी
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Lucknow लखनऊ। प्रदेश में नकली, अधोमानक, मिलावटी और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ योगी सरकार ने शिकंजा और कस दिया है। मरीजों तक सुरक्षित और गुणवत्तापरक दवाएं पहुंचाने के लिए अब औषधि लाइसेंस जारी करने से लेकर दवाओं के भंडारण, बिलिंग और पूरी सप्लाई चेन तक कड़ी निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने औषधि विक्रय लाइसेंस की आड़ में अवैध कारोबार, डमी व्यक्तियों के नाम पर लाइसेंस, फर्जी बिलिंग, स्टॉक में हेराफेरी और काउंटरफीट दवाओं के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गंभीर मामलों में कार्रवाई केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बीएनएस और एनडीपीएस की सुसंगत धाराओं के तहत भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी एसओपी में औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। नई व्यवस्था में कोडीन सिरप, पेन किलर, फास्ट मूविंग एवं हाई वैल्यू दवाओं के साथ एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। संदिग्ध दवाओं के मामले में खरीद-बिक्री की पूरी चेन के साथ बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड की भी बैक ट्रैकिंग होगी। नए थोक औषधि लाइसेंस के लिए आवेदक और फर्म की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन किया जाएगा। पहले अवैध दवा कारोबार में शामिल रहे व्यक्तियों को पति-पत्नी, भाई-बहन, माता-पिता, अन्य सगे-संबंधियों या किसी डमी व्यक्ति के नाम पर नया लाइसेंस हासिल करने से रोका जाएगा। गंभीर उल्लंघनकर्ताओं को लाइसेंस प्राप्त करने से डिबार किया जाएगा। उनके बिजनेस पार्टनर और एसोसिएट की भूमिका की भी जांच होगी।
इसके अतिरिक्त, आवासीय क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठानों को औषधि विक्रय लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। भौतिक निरीक्षण में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिस स्थान के लिए लाइसेंस मांगा गया है, उसका वास्तविक उपयोग व्यावसायिक गतिविधि के लिए ही हो रहा है। निरीक्षण के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि दुकान या प्रतिष्ठान वास्तविक लाइसेंसधारी ही चला रहा है या उसके नाम पर कोई दूसरा व्यक्ति कारोबार कर रहा है। बैंक खाता, जीएसटी पंजीकरण और अन्य कानूनी दस्तावेज भी लाइसेंसधारी के नाम पर होने चाहिए। लाइसेंस किसी महिला या अन्य व्यक्ति के नाम पर लेकर कारोबार किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाने की पुष्टि हुई तो लाइसेंस के निलंबन, निरस्तीकरण और अभियोजन की कार्रवाई होगी।
लाइसेंसी दुकान से अलग बेसमेंट, आवासीय मकान या किराए के कमरे में बिना लाइसेंस दवाओं का स्टॉक मिलने पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। यानी जांच अब केवल दुकान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दवाओं के वास्तविक भंडारण के संभावित ठिकाने भी खंगाले जाएंगे। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर ड्रग्स और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग तथा हाई वैल्यू दवाओं के लेजर स्टॉक और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाएगा। दोनों में अंतर मिलने पर खरीद-बिक्री और दवा के स्रोत की जांच होगी।
एक ही फर्म से माल खरीदकर उसी को वापस बेचने, असामान्य रूप से कम कीमत पर दवा बेचने, सीमित स्थानीय विक्रेताओं के बीच क्रॉस बिलिंग या केवल कागजों पर स्टॉक एडजस्टमेंट जैसी गतिविधियां मिलने पर जांच निर्माता स्तर तक पहुंचेगी। दूसरे राज्यों से आने वाली संदिग्ध दवाओं के मामले में संबंधित राज्य के औषधि निरीक्षकों के जरिए निर्माता और सप्लायर का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। योगी सरकार की नई व्यवस्था में दवा कारोबार में इस्तेमाल होने वाले बिलिंग सॉफ्टवेयर की भी जांच होगी। माइनस स्टॉक, बैक डेटेड बिलिंग, डेटा डिलीट करने, दोहरे खाते रखने अथवा वास्तविक स्टॉक छिपाने जैसी गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा।
छापेमारी के दौरान सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रिसिप्ट, ब्लिस्टर पैक पर दर्ज बैच और मुहर की तस्वीरें, संबंधित लोगों के बयान तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित करना अनिवार्य होगा। बैंक ट्रांजेक्शन की जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कागजी कारोबार के पीछे वास्तविक भुगतान और सप्लाई किसके बीच हुई।
संदिग्ध दवाओं के लेबल, स्पेलिंग, नाम, फॉर्मूला, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तिथि, निर्माता या मार्केटिंग कंपनी का पता, वायल एवं ब्लिस्टर पैकिंग, आकार और सिक्योरिटी फीचर तक की जांच की जाएगी। मूल दवा के नमूने से अंतर मिलने पर उसकी बिक्री तत्काल रोककर नमूना राजकीय विश्लेषक को भेजा जाएगा। यदि किसी दवा का वैध स्रोत नहीं मिलता या संबंधित निर्माता उसके निर्माण से इनकार करता है तो उसे काउंटरफीट/स्प्यूरियस मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजकीय विश्लेषक की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि होने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के साथ बीएनएस, 2023 की सुसंगत धाराओं में भी संयुक्त एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
सरकारी सप्लाई, ईएसआई, डिफेंस सप्लाई, फिजिशियन सैंपल या एक्सपायर्ड दवाओं को रिलेबल कर बाजार में बेचने की पुष्टि होने पर संबंधित स्टॉक को अभिरक्षा में लेकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पाद निर्धारित 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बजाय सामान्य तापमान पर रखे मिले तो उन्हें भी अभिरक्षा में लेकर नियमानुसार कार्रवाई होगी। अंतर-जनपदीय और अंतर-राज्यीय खरीद बिलों में गड़बड़ी मिलने पर दवा के वास्तविक स्रोत की पड़ताल होगी। कई फर्मों के बीच आपसी संबंध, कॉकस या बिलिंग लूप सामने आया तो नेटवर्क से जुड़ी सभी फर्मों की एक साथ सघन जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल संदिग्ध स्टॉक पकड़ना नहीं, बल्कि नकली और अवैध दवाओं की पूरी सप्लाई चेन और उसमें शामिल लोगों की भूमिका सामने लाना है।
काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा की पुष्टि अथवा गंभीर अनियमितता मिलने पर संबंधित दवा की बिक्री और वितरण तत्काल रोका जाएगा। स्टॉक सीज करने के साथ लाइसेंस के निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी। आदेश अधिकतम एक कार्य दिवस में लाइसेंसी को तामील कराना होगा। लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित फर्म से दवाओं की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद कराई जाएगी। वैध खरीद अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्टॉक के निस्तारण की अनुमति होगी। दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर पूरा स्टॉक राजकीय अभिरक्षा में लिया जाएगा।
कोडीन सिरप, पेन किलर और नारकोटिक्स एवं एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध क्रय-विक्रय पर विशेष निगरानी रहेगी। यदि जांच में इसके पीछे संगठित नेटवर्क या अपराध की पुष्टि होती है तो कार्रवाई केवल औषधि कानून तक सीमित नहीं रहेगी। बीएनएस, 2023 और एनडीपीएस की सुसंगत धाराओं के तहत भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। एफएसडीए ने सभी औषधि निरीक्षकों को एसओपी के प्रत्येक बिंदु का अक्षरशः पालन करने और जांच में अनावश्यक विलंब नहीं करने के निर्देश दिए हैं, ताकि साक्ष्य सुरक्षित रखते हुए नकली, अधोमानक, मिलावटी और अवैध दवा कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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