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इंस्टाग्राम पर ‘Pretty’ और ‘Beautiful’ लिखना अपराध नहीं! HC ने रद्द की छात्र की FIR

SHIDDHANT
21 July 2026 11:59 PM IST
इंस्टाग्राम पर ‘Pretty’ और ‘Beautiful’ लिखना अपराध नहीं! HC ने रद्द की छात्र की FIR
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निजी बातचीत को अपराध नहीं माना जा सकता
Bengaluru बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार को कॉलेज के एक 20 साल के छात्र के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। छात्र ने अपनी महिला क्लासमेट की तारीफ करते हुए उसे एक प्राइवेट इंस्टाग्राम मैसेज भेजा था। कोर्ट ने कहा कि निजी बातचीत में 'जेन जेड की भाषा' का इस्तेमाल करने को स्टॉकिंग, वॉयरिज्म या किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा अपराध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए आपराधिक कानून लागू नहीं किया जा सकता कि किसी छात्र ने निजी बातचीत में अपनी क्लासमेट की तारीफ की हो। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मुकदमों का युवा लोगों के भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है। यह मामला याचिकाकर्ता और उसकी 21 साल की क्लासमेट के बीच इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत से जुड़ा था; दोनों दोस्त थे और एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। याचिकाकर्ता ने उसे डायरेक्ट मैसेज भेजकर 'प्रिटी' (प्यारी) और 'ब्यूटीफुल' (सुंदर) कहा था, जिसे कोर्ट ने "जेन-जी लिंगो" (आजकल की पीढ़ी की भाषा) बताया।
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह निजी मैसेज बाद में शिकायतकर्ता के पिता को दिखाया गया, जो एक सीनियर आईपीएस अधिकारी हैं। इसके बाद छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66ए के तहत मामला दर्ज किया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि बातचीत सार्वजनिक नहीं थी और इस्तेमाल की गई भाषा आज के छात्रों के बातचीत के तरीके को दिखाती है। कोर्ट ने कहा, "यह चैट सार्वजनिक नहीं है। यह दो लोगों के बीच की बातचीत है। इसमें इस्तेमाल की गई भाषा वैसी ही है जैसी आजकल के छात्र इस्तेमाल करते हैं। इसे अपराध नहीं माना जा सकता।
हाई कोर्ट ने कहा कि निजी बातचीत में की गई तारीफ अपने आप में स्टॉकिंग (पीछा करना), वॉयरिज्म (किसी को छिपकर देखना) या किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा अपराध नहीं बनती। कोर्ट ने यह भी कहा कि आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की इजाजत देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इससे याचिकाकर्ता का भविष्य बेवजह खतरे में पड़ सकता है। इसके बाद, कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी और जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे जब्त की गई सभी चीजें, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी शामिल हैं, तुरंत याचिकाकर्ता को लौटा दें।
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