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विश्‍वयुद्ध का खतरा! रूस और यूक्रेन के लाखों सैनिक भारी हथियारों के साथ आमने-सामने, भारत क्यों कुछ नहीं बोल रहा?

jantaserishta.com
27 Jan 2022 12:02 PM IST
विश्‍वयुद्ध का खतरा! रूस और यूक्रेन के लाखों सैनिक भारी हथियारों के साथ आमने-सामने, भारत क्यों कुछ नहीं बोल रहा?
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नई दिल्ली: अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला को 19 जनवरी को कॉल किया था। उन्होंने श्रृंगला को यूक्रेन बॉर्डर पर रूसी सैनिकों की तैनाती को लेकर बातचीत की थी। हालांकि नई दिल्ली ने अब तक यूक्रेन मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है लेकिन भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि यूक्रेन मामले में दोनों पक्ष भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं। ऐसे में नई दिल्ली जल्दबाजी में कोई भी कदम नहीं उठाना चाहती है। भारत अमेरिका और रूस के साथ अपने समीकरण को खतरे में नहीं डालना चाहता है।
बता दें कि भारत की सैन्य आपूर्ति का करीब 60 फीसद रूसी निर्मित है। चीन के साथ बॉर्डर विवाद को लेकर भारत ने टोही और निगरानी के लिए कई अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया है। पश्चिमी देशों से 50 हजार सैनिकों के लिए सर्दी के कपड़े मंगवाए गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि भारत को इस बात का पता है कि पश्चिमी देशों से जारी रार के बीच मॉस्को, बीजिंग से मजबूत संबंध बना रहा है। ऐसे में भारत सभी पक्षों को देख रहा है।
नई दिल्ली के एक और चिंता यूक्रेन में रह रहे भारतीय हैं। इसमें अधिकतर मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स हैं। यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय एंबेसी ने कहा है कि किसी भी हालात से निपटने के लिए हम छात्रों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। सरकारी अनुमानों के मुताबिक 2020 में करीब 18 हजार छात्र यूक्रेन में थे। हालांकि कोरोना वायरस लॉकडाउन और कई जगहों पर ऑनलाइन क्लासेज के कारण छात्रों की संख्या में कमी संभव है।
भारत ने क्रीमिया मसले पे चिंता जताई थी लेकिन वैध रूसी हितों की बात कर रूस का साथ भी दिया था। उस वक्त तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन ने यह बात कही थी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के मामले पर संयम और ऑब्जेक्टिव रुख अपनाने के लिए भारत को धन्यवाद कहा था। उन्होंने आभार व्यक्त करने के लिए पीएम मनमोहन सिंह को कॉल भी किया था।
2014 के बाद से भारत के संबंध अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के साथ और बेहतर हुए हैं लेकिन मॉस्को के साथ बेहतर संबंध बने हुए हैं। यही कुछ कारण हैं कि भारत अब तक यूक्रेन मसले पर कुछ भी कहने से बचा है।

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