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विश्व कैंसर दिवस आज: पांच साल में 2207 रोगी, 100 से अधिक की गई जान

Admin Delhi 1
4 Feb 2023 2:08 PM GMT
विश्व कैंसर दिवस आज: पांच साल में 2207 रोगी, 100 से अधिक की गई जान
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बारां: बारां जिले में हर साल घातक रोग कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीते पांच साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में कैंसर के 2207 रोगी सामने आए है। इनमें से मुख कैंसर और स्तन कैंसर 68-68 मरीज है। वर्तमान में शहीद राजमल मीणा जिला अस्पताल में 20 कैंसर मरीज इलाज ले रहे है। जनवरी माह में 3 नए कैंसर के मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं,जिनमें से एक को कोटा रेफर किया गया।

मुहं और स्तन कैंसर के सबसे अधिक मरीज

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू, धूम्रपान, शराब तो मुख कैंसर के कारण है ही, लेकिन बारां सहित ग्रामीण में तंबाकू युक्त लाल मंजन भी कैंसर का बड़ा कारण बनकर सामने आया है। बारां सहित ग्रामीण क्षेत्र में इसका बड़ी संख्या में लोग उपयोग करते हैं। इसी के कारण जिले में मुख कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा सामने आए हैं। बीते पांच साल में बारां जिले में 2207 कैंसर रोगी सामने आए है। इनमे से वर्तमान में 20 मरीज जिला अस्पताल में संचालित कैंसर केयर वार्ड में इलाज ले रहे हैं। वहीं 175 कैंसर से पीड़ित मरीजों को बड़े सेंटर के लिए रेफर किया। विगत पांच सालों में मुहं के कैंसर के 68, स्तन कैंसर के 68, फेफडेÞ के कैंसर के 29, बच्चेदानी के 22, अन्य कैंसर के 104 रोगी है।

कैंसर से अब तक 100 से अधिक की जान जा चुकी

कैंसर भी घातक रोगों में से एक है। बारां जिला अस्पताल में 2018 में कैंसर केयर यूनिट प्रारंभ होने के बाद रजिस्टर्ड 100 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत होना सामने आया है। इन मरीजों में कैंसर इतना बढ़ गया था कि इनको हाई सेंटर में रेफर करने के बाद भी हाई सेंटर पर उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

प्रदेश की 24.7 फीसदी आबादी तंबाकू का सेवन कर रही, 1 करोड़ लोगों की हर साल हो जाती है मौत

डब्ल्यूएचओ के अनुसार कैंसर बीमारी विश्व में मृत्यु देने वाला दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इस बीमारी से पूरे विश्व में करीब हर 8 मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। करीब 1 करोड़ लोगों की हर साल इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है। पूरे विश्व में लगभग 6 मौतों में से 1 मौत कैंसर से होती है। थोड़ी सी लापरवाही घातक साबित हो सकती हैकोई शक नहीं कि वर्तमान में कैंसर सबसे घातक बीमारी है। थोड़ी सी लापरवाही व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकती है लेकिन विज्ञान के बढ़ते कदम इस भयंकर बीमारी पर अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञ तो यहां तक दावे कर रहे हैं कि प्रथम स्टेज पर कैंसर पेशेंट उनके संपर्क में आ जाये तो उसका उपचार संभव है, बल्कि उनकी जान भी बचाई जा सकती है। कोई शक नहीं कि वर्तमान में कैंसर सबसे घातक बीमारी है।

माह के पहले बुधवार को लगता है शिविर

शहीद राजमल मीणा जिला अस्पताल महीने के पहले बुधवार को कैंसर कैंप लगाया जाता है। जहां आने वाले मरीजों की जांच की जाती है और सैंपल आगे भेजे जाते हैं जिनमें कैंसर के लक्षण पाए जाते हैं। उन मरीजों को भर्ती किया जाता है उनका उपचार शुरू किया जाता है।

पांच साल में 10 सर्जरी

जिला अस्पताल में डॉक्टर हेमराज नागर के आने के बाद कैंसर की छोटी सर्जरी की सुविधा भी शुरू हो गई है। पिछले पांच साल में अब तक करीब 10 सर्जरी की जा चुकी है।

ये हैं प्रमुख लक्षण

लगातार दर्द की समस्या : शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द हो रहा है तो इस दर्द को पेन किलर के सहारे ज्यादा समय तक ना खींचे क्योंकि यह कैंसर का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है।

शरीर किसी हिस्से में गांठ का अहसास होना : शरीर के किसी हिस्से विशेष में कोई छोटा.बड़ा गांठ महसूस होता है तो इसे तुरंत डॉक्टर को दिखायें, क्योंकि शोध की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश गांठ कैंसर हो सकते है। ये गांठ शरीर के किसी भी हिस्से में देखे जा सकते है। मसलन स्तन, कांख, पैरों के जोड़ों में अगर समय रहते इसे कैंसर विशेषज्ञ को दिखाया जाये तो इसका भी उपचार समय रहते किया जा सकता है।

वजन का गिरना : मौसम परिवर्तन अथवा किसी वजह से खांसी आती है तो उसका मेडिसिन से इलाज किया जा सकता है। खांसी की वजह से कभी-कभी सीने में दर्द भी होता है लेकिन अगर दवा से लाभ नहीं मिल रहा है तो वक्त खराब किये बिना किसी विशेषज्ञ से सलाह-मशविरा करे। यह फेफ ड़े या थायरॉयड कैंसर का लक्षण हो सकता है।

मुंह के छाले : अकसर तीखी एवं ज्यादा खट्टी चीजें खाने से जुबान अथवा मसूड़ों में छाले आ जाते है। कभी.कभी पेट की खराबी के कारण भी छाले पड़ सकते है। कभी-कभी दांत नुकीले हो जायें, तब भी छाले पड़ सकते हैं। अगर ये छाले दवाओं से ठीक नहीं हो रहे हैं तो देर ना करें किसी नाक-कान-गले के चिकित्सक से सलाह ले। ये भी कैंसर के लक्षण हो सकते है। इसे भी प्रारंभिक स्टेज पर ठीक किया जा सकता है।

अब 80 प्रतिशत दवाइयों की उपलब्धता: जिले में कैंसर के मरीज बढ़ने पर सरकार ने इसके इलाज का दायरा भी बढ़ाया है। चिरंजीवी एवं स्वास्थ्य बीमा योजना में पैकेज बढ़ाया है। हां पहले जहां केवल 50 प्रतिशत दवाइयां मिलती थी उनकी उपलब्धता बढ़ाकर अब 80 प्रतिशत कर दी गई है।

जिला अस्पताल में प्रतिमाह के पहले बुधवार को कैंसर के रोगियों के उपचार के लिए कैंप लगाया जाता है। यहां आने वाले मरीजों की जांच की जाती है और हाई सेंटर पर सेंपल भेजे जाते हैं। जहां जांच में कैंसर के लक्षण पाए जाने पर उनको भर्ती किया जाता है, जिला अस्पताल में छोटी सर्जरी की जाती है वही अस्पताल में कैंसर पीड़ित मरीजों को सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि कैंसर किसी को भी हो सकता है। कैंसर एक बढ़ती उम्र का रोग है। तंबाकू, धुम्रपान, शराब आदि कैंसर के प्रमुख कारण है।

डॉक्टर हेमराज नागर, कैंसर रोग विशेषज्ञ

डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों से रखे परहेज, ताजे फल सब्जी खाएं: कैंसर से बचाव के लिए आमजन को तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए। डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। ताजे फलों और सब्जी ही खाना चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए और समय समय पर अस्पताल में स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। सरकार ने चिरंजीवी एवं स्वास्थ्य बीमा योजना में पैकेज बढ़ाए। हाँ पहले जहां कैंसर की केवल 50 प्रतिशत दवाइयां मिलती थी उनकी उपलब्धता बढ़ाकर अब 80 प्रतिशत कर दी गई है।

डॉ राजेंद्र मीणा, डिप्टी सीएमएचओ

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