संपत्ति में महिलाओं का अधिकार, क्यों इतना चिंतित है सुप्रीम कोर्ट?

नई दिल्ली: भारत में महिला सशक्तीकरण की तमाम पहलों के बीच अभी भी 65 साल पुराना एक कानून ऐसा है जो संपत्ति के मामले में महिला और पुरुषों में भेदभाव करता है। सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के भेदभावकारी प्रावधान पर केंद्र से उसकी राय तलब की है। दरअसल, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के मुताबिक, यदि किसी शादीशुदा निसंतान पुरुष का निधन हो जाए तो उसकी संपत्ति निर्विवाद रूप से उसके माता-पिता की हो जाती है, लेकिन अगर विधवा निसंतान महिला का निधन हो जाएगा, तो उसकी संपत्ति (माता-पिता से मिली संपत्ति के अलावा) उसके सास-ससुर या रिश्तेदारों की होती है।
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