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23 सितंबर महाकाल भस्म आरती
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार 23 सितंबर को तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को फूलों, भस्म और चंदन से सजाया गया। भोर में मंदिर के पट खुलने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया और इसके बाद भस्म आरती हुई। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में से एक है। प्रतिदिन तड़के बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंचते हैं। सबसे पहले भगवान महाकाल को जल अर्पित कर पंचामृत अभिषेक किया जाता है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और अन्य पूजन सामग्री से भगवान का अभिषेक कर श्रृंगार किया जाता है। चंदन और भस्म से बाबा महाकाल का स्वरूप सजाया जाता है।
बुधवार को भी बाबा महाकाल के श्रृंगार में विशेष फूलों का इस्तेमाल किया गया। भगवान के मस्तक पर चंदन से आकर्षक तिलक लगाया गया और भस्म से श्रृंगार किया गया। इसके बाद वस्त्र और फूल-मालाएं अर्पित की गईं। श्रृंगार पूरा होने के बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
मान्यता है कि भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में श्री महाकालेश्वर का विशेष स्थान है। महाकालेश्वर को दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। पर्व और विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ जाती है।
भस्म आरती के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है। मंत्रोच्चार, घंटियों और डमरू की ध्वनि के बीच भगवान महाकाल की आराधना की जाती है। आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का क्रम जारी रहता है। बाबा महाकाल के हर दिन होने वाले अलग-अलग श्रृंगार की तस्वीरें और वीडियो भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है। श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए वर्षभर देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। आज के श्रृंगार में फूल, चंदन और भस्म से सजे बाबा महाकाल का स्वरूप भक्तों को आकर्षित कर रहा है।
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